अब AI नहीं SI…डोनाल्ड ट्रंप ने बदला नाम, जानें क्या है वजह 

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Super Intelligence: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानि AI की दुनिया में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि दुनिया की सबसे बड़ी AI कंपनियों के टॉप लीडरशिप ने इस तेजी से बढ़ती तकनीक के चारों ओर सुरक्षा घेरा मजबूत करने के लिए एक मोरल बाइंडिंग समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके बाद ट्रंप ने AI का नाम बदलकर “Super Intelligence” (सुपर इंटेलिजेंस) करने का एक बड़ा ऐलान किया.

ट्रंप ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सभी टेक कंपनियां एक समझौते के जरिए खुद पर खुद ही नजर रखेंगी, जो कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं होगा. इस ऐतिहासिक बैठक में टेक जगत के लगभग सभी बड़े नाम जैसे- Nvidia के सीईओ Jensen Huang, OpenAI के प्रेसिडेंट Greg Brockman, Anthropic के सीईओ Dario Amodei, Meta के सीईओ Mark Zuckerberg, Elon Musk, Amazon के फाउंडर Jeff Bezos, Microsoft के सीईओ Satya Nadella और Google के सीईओ Sundar Pichai मुख्य रूप से मौजूद रहे.

अब Artificial Intelligence नहीं, Super Intelligence कहिए

ऐसे में AI का आधिकारिक नाम बदलकर ‘Super Intelligence’ (SI) कर दिया गया है. दरअसल, ट्रंप का यह तर्क था कि इस तकनीक की ताकत और असीम क्षमताओं को देखते हुए अब इसे ‘आर्टिफिशियल’ कहना सही नहीं है. ऐसे में इस आदेश के अनुसार, ये टर्मिनोलॉजी इन तकनीकों की क्रांतिकारी क्षमताओं और अमेरिकी लोगों के लिए पैदा होने वाले अवसरों को दर्शाने वाली होनी चाहिए. ऐसे में Super Intelligence शब्द इन तकनीकों के वादों, क्षमता और तेजी से आगे बढ़ने वाली ताकतों को अधिक सटीक रूप से बयान करता है. इस वजह से मेरी सरकार की ये नीति है कि कानून से अधिकतम सीमा तक, सभी सरकारी शाखाएं ‘Artificial Intelligence’ और ‘AI’ के स्थान पर ‘Super Intelligence’ और ‘SI’ शब्दों का ही अनिवार्य रूप से उपयोग करेंगी. वहीं अब किसी भी आधिकारिक बैठक या सेटिंग में पुराने नाम को मान्यता नहीं दी जाएगी.

व्हाइट हाउस का ‘फोर-लेयर’ सुरक्षा फॉर्मूला

वहीं, व्हाइट हाउस द्वारा जारी दस्तावेज़ “White House Accord on Super Intelligence: Joint Commitment on Frontier Responsibilities” के अनुसार, जनता का विश्वास जीतने के लिए कंपनियों को सुरक्षा और ऑडिट के चार स्तरों का पालन करना होगा.

  • साइबर और बायो-खतरों की निगरानी: ट्रेनिंग और डिप्लॉयमेंट के दौरान AI मॉडल्स की साइबर सुरक्षा, बायो-सिक्योरिटी और केमिकल खतरों से जुड़े जोखिमों के लिए लगातार कड़ी निगरानी की जाएगी.
  • इन-हाउस सुरक्षा टीमें: कंपनियां अपने भीतर एक डेडिकेटेड इंटरनल टीम्स का गठन करेंगी जो यह सुनिश्चित करेगी कि सभी सुरक्षा उपाय सही ढंग से काम कर रहे हैं या नहीं.
  • थर्ड-पार्टी बाहरी ऑडिट: इन सभी सुरक्षा उपायों और आंतरिक कंट्रोल्स की निष्पक्ष जांच के लिए पूरी तरह स्वतंत्र बाहरी ऑडिटर्स की सर्विस ली जाएंगी.
  • स्वतंत्र बोर्ड समितियां: पूरी प्रक्रिया पर निगरानी रखने और कमियों को तुरंत ठीक करने के लिए कंपनियों के बोर्ड में पूरी तरह स्वतंत्र बोर्ड कमिटीज का गठन किया जाएगा.

इस बीच Meta के सीईओ Mark Zuckerberg ने इस समझौते पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य ग्राहकों को ये भरोसा दिलाना है कि AI सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित और उम्मीद के मुताबिक ही काम करेंगे. उन्होंने इस समझौते को पूरी इंडस्ट्री के लिए सुरक्षा मानक तय करने की दिशा में एक बहुत ही जरूरी शुरुआत बताया.

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