वायु प्रदूषण सिर्फ गले और फेफड़ों को ही नहीं, डीएनए को भी कर रहा प्रभावित, फर्टिलिटी पर नई स्टडी में सामने आए चौंकाने वाले नतीजे

Aarti Kushwaha
Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
Must Read
Aarti Kushwaha
Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Air pollution: हवा में घुले धूल मिट्टी के कण और ढेर सारी गैसे सिर्फ गले और फेफड़ों को ही बर्बाद नहीं कर रहा बल्कि यह स्पर्म के DNA तक को बदल दे रहा. दरअसल, अपनी तरह की सबसे बड़ी फर्टिलिटी स्टडी में चौकाने वाली बात सामने आई है. स्टडी में पाया गया है कि वायु प्रदूषण स्पर्म जीन्स के काम करने के तरीके को ही बदल सकता है. जिन पुरुषों में स्पर्म बनने के दौरान आम वायु प्रदूषकों (पोल्यूटेंट) का असर देखा गया, उनमें DNA में मामूली बदलाव पाए गए. इन बदलावों से जीन्स के चालू या बंद होने पर असर पड़ा, जिससे पुरुषों की फर्टिलिटी को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ने की संभावना जताई जा रही है.

रिपोर्ट के अनुसार मंगलवार, 7 जुलाई को लंदन में ‘यूरोपियन सोसाइटी ऑफ ह्यूमन रिप्रोडक्शन एंड एम्ब्रियोलॉजी’ की सालाना बैठक में यह स्टडी पेश की गई, जिसमें ओजोन और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड को उन प्रदूषकों के तौर पर पहचाना गया, जिनका इन ‘एपिजेनेटिक’ बदलावों से सबसे गहरा संबंध है. बता दें कि एपिजेनेटिक्स (Epigenetics) बायोलॉजी की वह शाखा है जो यह अध्ययन करती है कि हमारा पर्यावरण और जीवनशैली हमारे DNA के मूल कोड को बदले बिना, हमारे जीन्स के काम करने के तरीके को कैसे प्रभावित करते हैं.

स्टडी में क्या पता चला?

रिपोर्ट के मुताबिक, स्टडी का नेतृत्व करने वालीं यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स एमहर्स्ट की महामारी विज्ञानी (एपिडेमियोलॉजिस्ट) डॉ. कैरी नोबल्स ने बताया कि “हमारी स्टडी से पता चलता है कि स्पर्म बनने के अहम चरणों के दौरान वायु प्रदूषण के संपर्क में आने से स्पर्म DNA में बदलाव हो सकते हैं.”

स्टडी में साल 2013 से 2017 के बीच 2,000 से ज्यादा पुरुषों को शामिल किया गया, जिन्होंने शुरुआत में और फिर दो, चार और छह महीने बाद सीमेन के सैंपल दिए. रिसर्चर्स ने हर सैंपल इकट्ठा करने से पहले के तीन महीनों के दौरान हर व्यक्ति बाहरी वायु प्रदूषकों (जैसे ओजोन, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और बारीक कण) से कितना संपर्क में आया, इसका अनुमान लगाया. इस दौरान पता चला कि वायु प्रदूषण पुरुषों की फर्टिलिटी को कम कर सकता है, लेकिन इसके पीछे की बायोलॉजिकल प्रक्रियाएं स्पष्ट नहीं थीं.

‘DNA मिथाइलेशन’ की तरफ संकेत

यह स्टडी ‘DNA मिथाइलेशन’ की तरफ संकेत करती है. दरअसल DNA मिथाइलेशन, DNA से जुड़े केमिकल टैग होते हैं जो जेनेटिक कोड को बदले बिना जीन्स के चालू या बंद होने को नियंत्रित करते हैं और यह एक संभावित कारण हो सकता है. वहीं, वैज्ञानिकों ने उन 1,220 पुरुषों के स्पर्म DNA मिथाइलेशन को एनालाइज किया जिन्होंने छह महीने बाद फॉलो-अप में सैंपल दिया था. उन्होंने वायु प्रदूषण के मिश्रण से जुड़े DNA में 39 बदलावों की पहचान की, जिनमें ओजोन और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड का गहरा असर देखा गया.

Latest News

₹1,500 करोड़ के सुपारी सिंडिकेट पर ED का बड़ा एक्शन, काली कमाई से खरीदे आलीशान बंगले, 4 राज्यों में 20 ठिकानों पर रेड

विदेशी सुपारी की कथित तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED ने असम, मिजोरम, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के 20 ठिकानों पर छापेमारी की है. एजेंसी के मुताबिक, नेटवर्क ने ₹1,500 करोड़ से अधिक की अपराध से अर्जित आय पैदा की. कार्रवाई में ₹1.30 करोड़ नकद जब्त किए गए और 33 बैंक खाते फ्रीज किए गए.

More Articles Like This