El Nino Alert: अगले साल मछली उत्पादन पर मंडरा सकता है बड़ा संकट, CMFRI ने ऑयल सार्डिन को लेकर जारी की चेतावनी

Shivam
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El Nino Alert: देश के समुद्री मत्स्य क्षेत्र के लिए एक बड़ी चेतावनी सामने आई है. केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (CMFRI) ने आगाह किया है कि अल नीनो (El Nino) की वजह से अगले साल समुद्री मछली उत्पादन प्रभावित हो सकता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि फिलहाल भारतीय तट पर ऑयल सार्डिन (Indian Oil Sardine) की उपलब्धता अच्छी है, लेकिन समुद्र के बढ़ते तापमान और समुद्री ताप तरंगों (Marine Heatwaves) के कारण वर्ष 2027 में इसकी संख्या में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है. इसका असर केवल मछली उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मछली पकड़ने वाले उद्योग और तटीय समुदायों की आजीविका पर भी पड़ सकता है.

CMFRI ने जताई चिंता

केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (CMFRI) के निदेशक डॉ. ग्रिंसन जॉर्ज ने शुक्रवार को संस्थान में आयोजित राष्ट्रीय मत्स्यपालक दिवस समारोह का उद्घाटन करते हुए इस विषय पर चिंता जताई. डॉ. ग्रिंसन जॉर्ज ने कहा, “अल नीनो से जुड़ी गर्मी इस साल अक्टूबर-दिसंबर के दौरान और तेज होने की आशंका है, जिसका असर अप्रैल-मई 2027 तक उत्तरी हिंद महासागर में महसूस किया जा सकता है.”

उन्होंने कहा, “इस साल ऑयल सार्डिन का भंडार प्रचुर मात्रा में है, लेकिन अनुमानित तापमान वृद्धि होने पर 2027 में इस संसाधन पर असर पड़ने की संभावना है. छोटी पेलाजिक मछलियां, विशेष रूप से ऑयल सार्डिन, समुद्री ताप तरंगों और महासागर के तापमान में वृद्धि के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील हैं.”

मछली उत्पादन में आ सकती है भारी गिरावट

डॉ. ग्रिंसन जॉर्ज ने चेतावनी दी, “अनुमानित तापमान वृद्धि से समुद्री मछली उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है, जिससे मछली पकड़ने का उद्योग और तटीय समुदायों की आजीविका दोनों प्रभावित होंगी.” उन्होंने जलवायु पूर्वानुमानों का हवाला देते हुए बताया कि उपलब्ध वैज्ञानिक आंकड़ों के अनुसार अगले वर्ष अप्रैल और मई के दौरान समुद्री ताप तरंगों, समुद्र की सतह के तापमान और समुद्री जल के खारेपन में वृद्धि की संभावना अधिक है.

केवल सार्डिन ही नहीं, दूसरी प्रजातियां भी होंगी प्रभावित

वैज्ञानिकों के मुताबिक, बढ़ते समुद्री तापमान का असर सिर्फ ऑयल सार्डिन तक सीमित नहीं रहेगा. लगातार बढ़ता तापमान समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी गंभीर चुनौती बन सकता है. डॉ. ग्रिंसन जॉर्ज ने चेतावनी दी, “लगातार महासागर के तापमान में वृद्धि से नाजुक प्रवाल भित्ति पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे प्रवाल विरंजन हो सकता है और रेड स्नैपर जैसी प्रवाल भित्ति से जुड़ी प्रजातियों की संख्या में कमी आ सकती है.”

मछुआरों को जारी की जाएगी विशेष सलाह

बदलते मौसम और समुद्री परिस्थितियों को देखते हुए CMFRI ने घोषणा की है कि वह इस वर्ष के अंत तक मछुआरों और मछली पालकों के लिए अल नीनो संबंधी विशेष एडवाइजरी जारी करेगा. इसका उद्देश्य उन्हें मौसम और समुद्री परिस्थितियों के अनुसार मछली पकड़ने तथा मत्स्य पालन से जुड़े फैसले लेने में मदद करना है.

मछली पालकों को भी सतर्क रहने की सलाह

संस्थान ने मछली पालकों को भी अचानक बदलने वाली पर्यावरणीय परिस्थितियों के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी है. डॉ. ग्रिंसन जॉर्ज ने कहा, “लंबे समय तक उच्च तापमान और खारेपन के बाद भारी बारिश से खारेपन के स्तर में तेजी से उतार-चढ़ाव आ सकता है, जिससे तटीय मत्स्य पालन बाधित हो सकता है और उत्पादन हानि का खतरा बढ़ सकता है.”

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