Gas Cylinder Color Code: जब भी गैस सिलेंडर की बात होती है तो हमारे दिमाग में सबसे पहले रसोई में रखा लाल रंग का एलपीजी सिलेंडर आता है. लेकिन बाजार में सफेद, नीले, काले और ग्रे रंग के सिलेंडर भी देखने को मिलते हैं. दरअसल गैस सिलेंडर का रंग सिर्फ दिखावे के लिए नहीं होता, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण सेफ्टी कोड होता है. सिलेंडर का रंग देखकर ही पता चल जाता है कि उसके अंदर कौन-सी गैस भरी हुई है.
लाल रंग का सिलेंडर
लाल रंग के सिलेंडर में लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) भरी होती है. यही गैस हमारे घरों में खाना बनाने के लिए इस्तेमाल की जाती है. लाल रंग खतरे का संकेत भी माना जाता है, क्योंकि LPG जल्दी आग पकड़ सकती है.
सफेद रंग का सिलेंडर
सफेद रंग के सिलेंडर आमतौर पर अस्पतालों और एंबुलेंस में दिखाई देते हैं. इनमें ऑक्सीजन गैस भरी होती है. मेडिकल इमरजेंसी में इसे तुरंत पहचानने के लिए सफेद रंग का इस्तेमाल किया जाता है.
नीले रंग का सिलेंडर
नीले रंग के सिलेंडर में नाइट्रस ऑक्साइड गैस होती है. इसे आम भाषा में ‘लाफिंग गैस’ भी कहा जाता है. डॉक्टर और डेंटिस्ट इस गैस का उपयोग मरीजों को एनेस्थीसिया देने या दर्द कम करने के लिए करते हैं.
काले रंग का सिलेंडर
काले रंग के सिलेंडर में नाइट्रोजन गैस भरी होती है. यह गैस बहुत कम रिएक्टिव होती है. इसका इस्तेमाल उद्योगों में, खाद्य पैकेजिंग में और आजकल वाहनों के टायरों में हवा भरने के लिए भी किया जाता है.
ग्रे या स्लेटी रंग का सिलेंडर
ग्रे या स्लेटी रंग के सिलेंडर में कार्बन डाइऑक्साइड गैस होती है. इसका इस्तेमाल आग बुझाने वाले यंत्रों और कोल्ड ड्रिंक बनाने वाली फैक्ट्रियों में किया जाता है.
भूरा रंग का सिलेंडर
भूरे रंग के सिलेंडर में हीलियम गैस भरी होती है. यह गैस सामान्य हवा से हल्की होती है और इसका इस्तेमाल गुब्बारों को उड़ाने में किया जाता है. गैस सिलेंडरों के अलग-अलग रंग हमारी सुरक्षा के लिए तय किए गए हैं.
इससे दूर से ही यह पहचान हो जाती है कि सिलेंडर के अंदर कौन-सी गैस मौजूद है और उसे किस तरह सावधानी से इस्तेमाल करना चाहिए.
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