अफगानिस्तान में बाढ़ का कहर: 77 की मौत, हजारों घर तबाह, खेती को भारी नुकसान

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

अफगानिस्तान में इन दिनों मौसम ने ऐसा रौद्र रूप दिखाया है, जिसने हजारों लोगों की जिंदगी को एक झटके में बदल कर रख दिया है. लगातार हो रही भारी बारिश के बाद अचानक आई बाढ़ ने कई प्रांतों में भारी तबाही मचा दी है. हालात इतने खराब हो गए हैं कि लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर भागने को मजबूर हो गए हैं.

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 26 मार्च से 4 अप्रैल के बीच आई इस आपदा में कम से कम 77 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 137 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं. कई लोग अब भी लापता हैं, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका बनी हुई है.

सैकड़ों घर बहे, हजारों परिवार हुए बेघर

बाढ़ का सबसे ज्यादा असर रिहायशी इलाकों पर पड़ा है. सैकड़ों घर पूरी तरह बह गए हैं और 3,400 से ज्यादा घरों को गंभीर नुकसान पहुंचा है. जिन लोगों ने सालों की मेहनत से अपना आशियाना बनाया था, वह कुछ ही घंटों में मलबे में तब्दील हो गया. चार लोगों के अब भी लापता होने की खबर है, जिससे यह अंदेशा जताया जा रहा है कि नुकसान का आंकड़ा और बढ़ सकता है. प्रभावित इलाकों में लोगों के सामने रहने, खाने और पीने की बड़ी समस्या खड़ी हो गई है.

सड़कें बंद, राहत और बचाव कार्य में आई भारी रुकावट

भारी बारिश और बाढ़ के कारण कई इलाकों में सड़कें पूरी तरह से बाधित हो गई हैं. जगह-जगह पानी भर जाने और मलबा जमा होने से परिवहन व्यवस्था ठप पड़ गई है.

इसका सीधा असर राहत और बचाव कार्यों पर पड़ा है. दूर-दराज के क्षेत्रों में फंसे लोगों तक मदद पहुंचाना मुश्किल हो गया है. प्रशासन को कई इलाकों में पहुंचने के लिए वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है.

खेती और पशुधन को भारी नुकसान, ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर संकट

इस आपदा का गहरा असर खेती और पशुपालन पर भी पड़ा है. हजारों एकड़ कृषि भूमि पूरी तरह बर्बाद हो गई है, जिससे किसानों की आजीविका पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है.

जानकारी के अनुसार, 3,000 से ज्यादा जेरिब खेती की जमीन खराब हो गई है. इसके अलावा 1,000 से ज्यादा पशुओं की मौत हो चुकी है. यह नुकसान केवल आर्थिक नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन के लिए भी बड़ा झटका है.

कई प्रांतों में मौसम का कहर, हालात और बिगड़े

रिपोर्ट्स के अनुसार, परवान, वरदक, कंधार, जौजजान, फरयाब और बामियान जैसे कई प्रांत इस आपदा से प्रभावित हुए हैं. इन इलाकों में भारी बारिश के साथ-साथ बर्फबारी और तूफान ने भी हालात को और गंभीर बना दिया है. बर्फ जमने के कारण कई महत्वपूर्ण सड़कें बंद हो गई हैं, जिससे कनेक्टिविटी पूरी तरह बाधित हो गई है. प्रशासन को सड़कों से बर्फ हटाने और रास्ते खोलने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने पड़ रहे हैं.

पहले भी झेल चुका है देश ऐसी तबाही

अफगानिस्तान पहले भी ऐसी प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर चुका है. वर्ष 2024 में आई भीषण बाढ़ में सैकड़ों लोगों की जान चली गई थी और बड़े पैमाने पर घर और खेती की जमीनें नष्ट हो गई थीं. इसके अलावा 22 जनवरी को भी भारी बर्फबारी और बारिश के कारण कई प्रांतों में कम से कम 11 लोगों की मौत हुई थी और कई अन्य घायल हुए थे. यह दिखाता है कि देश लगातार मौसम संबंधी आपदाओं की मार झेल रहा है.

न्यूज एजेंसी सिन्हुआ ने बताया कि अधिकारियों की शुरुआती रिपोर्ट से पता चला है कि खराब मौसम ने पूर्वी परवान, वरदक, दक्षिणी कंधार, उत्तरी जौजजान, फरयाब और मध्य बामियान प्रांतों के लोगों पर असर डाला है. प्रवक्ता ने कहा कि तूफान ने नौ घरों को थोड़ा नुकसान पहुंचाया और 530 जानवरों की जान चली गई है। इसकी वजह से इन खेती वाले इलाकों में स्थानीय रोजगार पर बहुत बुरा असर पड़ा है.

उन्होंने यह भी कहा कि बर्फ जमा होने से खास सड़कें बंद हो गई हैं, जिससे अधिकारियों को कनेक्टिविटी ठीक करने और मदद पहुंचाने के लिए तुरंत बर्फ हटाने का काम शुरू करना पड़ा.

बढ़ती प्राकृतिक आपदाएं बनी बड़ी चुनौती

लगातार आ रही प्राकृतिक आपदाएं अफगानिस्तान के लिए एक बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं. कमजोर बुनियादी ढांचा, सीमित संसाधन और कठिन भौगोलिक परिस्थितियां राहत कार्यों को और मुश्किल बना देती हैं. अगर ऐसे हालात जारी रहे, तो आने वाले समय में नुकसान और बढ़ सकता है और लाखों लोगों की जिंदगी प्रभावित हो सकती है.

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