अफगानिस्तान में भाषा की शुद्धता काे लेकर बड़ा फैसला, बदलें जाएंगे टीवी-मोबाइल और ट्रेन जैसे शब्द

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Afghanistan: अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने देश में इस्तेमाल होने वाले विदेशी शब्द बदलने का फैसला किया है, जिसके तहत अब टीवी, मोबाइल, ट्रेन और ऐसे अन्य शब्दों को आधिकारिक और प्रशासनिक भाषा में बदलने की प्रक्रिया शुरू होगी. इसके लिए न्याय मंत्रालय की अगुवाई में एक समिति बनाई जाएगी. इसमें शिक्षा, उच्च शिक्षा, सूचना और संस्कृति मंत्रालय, विज्ञान अकादमी और प्रशासनिक विभागों के अधिकारी शामिल होंगे.

यह समिति विदेशी शब्दों का मूल्यांकन करेगी और उनके लिए सही विकल्प सुझाएगी. इसके बाद ये नए शब्द प्रशासनिक और सरकारी दस्तावेजों में इस्तेमाल किए जाएंगे. तालिबान नेता मौलवी हैबतुल्लाह अखुंदजादा ने इसका फरमान जारी किया है, जिसे रविवार से ही लागू कर दिया गया.

हर विभाग को लिस्ट तैयार करने के आदेश

बता देंं कि तालिबान सरकार की सभी एजेंसियों को इस काम में सहयोग करना होगा. हर विभाग को अपने इस्तेमाल किए जाने वाले विदेशी शब्दों की सूची तैयार करनी होगी और समिति को उपयुक्त विकल्प देने होंगे. अंतिम फैसला मौलवी हैबतुल्लाह अखुंदजादा लेंगे.

दरअसल, अफगानिस्तान में भाषा की शुद्धता पर पहले भी ध्यान दिया जाता रहा है. पहले के नेताओं ने भी विदेशी शब्दों को हटाने और स्थानीय भाषा को बढ़ावा देने के आदेश दिए थे. पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई ने 2012 में विदेशी शब्द हटाने का फरमान दिया था, लेकिन उस समय गंभीरता की कमी के कारण बदलाव सीमित रहे.

हटाए गए अंग्रेजी शब्दों वाले बैनर

तालिबान सरकार ने बीते पांच सालों में शहर स्तर पर भी विदेशी शब्दों को कंट्रोल करने की कोशिश की है. कई नगरपालिकाओं ने शहरों में अंग्रेजी या बाकी विदेशी शब्दों वाले बैनर और बिलबोर्ड हटा दिए. हाल ही में अंग्रेजी शब्दों को अरबी नामों से बदलने के प्रयास हुए, लेकिन इससे अरबी नामों की संख्या बढ़ गई.

नए फरमान का मकसद अफगानिस्तान की भाषा और संस्कृति को मजबूत करना है. सरकार का मानना है कि विदेशी शब्दों की जगह स्थानीय शब्दों का इस्तेमाल करने से लोगों की भाषा और पहचान सुरक्षित रहेगी. अब हर सरकारी दस्तावेज और प्रशासनिक कामकाज में नए शब्दों का इस्तेमाल अनिवार्य होगा. यह कदम तालिबान की भाषा नीति का हिस्सा है.

 

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