Aisha Wahab: अफगानिस्तान लंबे समय से दुनियाभर में संघर्ष की धरती के रूप में जाना जाता रहा है. पहले रूस, फिर अमेरिका, इसके बाद आपसी संघर्ष के कारण अफगानिस्तान सुर्खियों में रहा है, जिसके वजह से अफगानिस्तान के विकास की रफ्तार भी सुस्त ही रही. इसका असर सबसे ज्यादा वहां की महिलाओं पर देखा गया. यहां तक कि आज भी अफगानिस्तान में लड़कियों के आगे बढ़ने के मौके बेहद सीमित है. लेकिन इसी बीच से आयशा वहाब ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है.
US संसद की पहली अफगान-अमेरिकी महिला
बता दें कि आयशा वहाब अमेरिकी संसद के लिए निर्वाचित होने वाली पहली अफगान-अमेरिकी महिला बनी हैं. 39 साल की आयशा वहाब डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रगतिशील नेता के रूप में चर्चित हैं. उन्होंने कैलिफोर्निया के 14वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट के लिए हुए विशेष चुनाव में जीत हासिल कर ली है. इस सीट के चुनाव में आयशा ने मध्यमार्गी डेमोक्रेट मेलिसा हर्नांडेज को हराया. दरअसल, डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता एरिक स्वालवेल ने यौन दुराचार के आरोपों के बीच यह सीट खाली कर दी थी.
जीत के बाद कहा- वोटरों ने इतिहास रच दिया
वहाब ने चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद अपने एक बयान में कहा कि ‘‘आज इस जिले ने पहली अफगान-अमेरिकी को संसद के लिए चुनकर इतिहास रच दिया.” घोषित नतीजों के मुताबिक, वहाब को कुल मतों में से 53.09 प्रतिशत वोट मिले जबकि हर्नांडेज को 46.91 प्रतिशत मत प्राप्त हुए. आयशा स्वालवेल के शेष कार्यकाल के लिए यानी अगले साल 20 जनवरी तक पद पर रहेंगी. हालांकि, नवंबर में पूर्ण कार्यकाल के लिए होने वाले चुनाव में उनका एक बार फिर हर्नांडेज से कड़ा मुकाबला होने की संभावना है.
अफगान हमले के दौरान भागकर न्यूयॉर्क पहुंचे थे वहाब के माता-पिता
आपको बता दें कि आयशा के माता-पिता सोवियत आक्रमण के दौरान अफगानिस्तान से भागकर न्यूयॉर्क शहर में बस गए थे, जहां 1987 में उनका जन्म हुआ. उनके पिता की कुछ समय बाद हत्या कर दी गई और उसके बाद उनकी मां की भी मौत हो गई. जिसके बाद आयशा और उनकी बड़ी बहन ‘फोस्टर केयर’ व्यवस्था में पली-बढ़ीं.
दरअसल, ‘फोस्टर केयर’ ऐसी व्यवस्था है जिसमें किसी बच्चे की देखभाल उसके जैविक माता-पिता के बजाय किसी दूसरे परिवार या देखभालकर्ता द्वारा अस्थायी रूप से की जाती है. आयशा जब करीब नौ साल की थीं, तब कैलिफोर्निया के फ्रेमोंट में रहने वाले एक अफगान-अमेरिकी दंपति ने दोनों को गोद ले लिया.

