Al-Aqsa mosque: यरुशलम के सबसे संवेदनशील धार्मिक स्थल पर गुरुवार को बड़ा हंगामा देखने को मिला. इजरायल के हजारों यहूदी कट्टरपंथी वहां पहुंचे और उनके साथ इजरायल के बेहद दक्षिणपंथी राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर भी मौजूद थे. इस घटना ने पूरे इलाके में तनाव और बढ़ा दिया. हालांकि ये सभी लोग हथियारबंद इजरायली पुलिस की सुरक्षा में धार्मिक स्थल के अंदर गए. वहां उन्होंने प्रार्थना की, इजरायल का झंडा लहराया और राष्ट्रगान गाया. फिलहाल इसे राजनीतिक ताकत दिखाने वाली उकसाने वाली कार्रवाई मानी जा रही है.
दरअसल ‘स्टेटस क्वो’ कई दशक पुराना एक नाजुक समझौता है, जिसके तहत इस जगह पर गैर-मुसलमानों को प्रार्थना करने की अनुमति नहीं है. एक ओर जहां मुसलमान इस जगह को अल-हरम अल-शरीफ कहते हैं, वहीं, दूसरी ओर यहूदी इसे टेम्पल माउंट कहते हैं.
इतामार बेन-गवीर ने समझौते को किया कमजोर
बता दें कि पिछले कुछ वर्षों में इतामार बेन-गवीर ने कई विवादित दौरों और यहूदी श्रद्धालुओं के लिए नियमों में एकतरफा बदलाव करके इस समझौते को कमजोर किया है. उन्होंने वहां यहूदियों को प्रार्थना की किताबें और छपी हुई धार्मिक सामग्री ले जाने की भी अनुमति दिलाई. इसके अलावा, जनवरी में उन्होंने अपने एक करीबी वैचारिक सहयोगी को यरुशलम पुलिस का प्रमुख बनवाया. इससे इस धार्मिक स्थल से जुड़े और बड़े बदलावों का रास्ता आसान हो गया.
गुरुवार को क्या हुआ?
गौरतलब है कि गुरुवार को इजरायली लोगों ने परिसर के उन हिस्सों में भी प्रार्थना की, जो अल-अक्सा मस्जिद और सातवीं सदी में बने डोम ऑफ द रॉक के पास हैं. वहीं, इजरायली अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, लिकुड पार्टी के सांसद अमित हलेवी भी उस समूह में शामिल थे जिसने इजरायल का झंडा लहराया और राष्ट्रगान गाया. रिपोर्ट में उन इजरायली ‘टेम्पल माउंट’ कार्यकर्ताओं का हवाला दिया गया है, जो इस जगह पर यहूदियों को पूजा करने का अधिकार दिलाने की मांग कर रहे हैं.
सिनेगॉग बनाना चाहते है यहूदी
इस हंगामें भी कवायद के बाद इतामार बेन-गवीर ने एक पोस्ट में लिखा कि हम यहां बहुत बड़ी प्रगति देख रहे हैं. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वहां प्रार्थना करने वाले यहूदियों को ऐसा महसूस होता है जैसे वे इस जगह के मालिक हों. वह पहले भी कह चुके हैं कि वह अल अक्सा मस्जिद के परिसर में इजरायल का झंडा फहराना चाहते हैं और वहां एक यहूदी उपासना स्थल (सिनेगॉग) बनाना चाहते हैं.
बता दें कि गुरुवार को यहूदियों का पवित्र दिन तिशा ब’आव भी था. इस दिन उसी जगह पर बने पहले मंदिर, जिसे ईसा पूर्व 10वीं सदी में नष्ट कर दिया गया था, और दूसरे मंदिर, जिसे ईस्वी सन 70 में रोमन साम्राज्य ने ध्वस्त कर दिया था, को याद किया जाता है.

