Bhadrapada Amavasya 2026: हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है. खासकर पितरों के स्मरण और उनके निमित्त किए जाने वाले तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य के लिए अमावस्या को महत्वपूर्ण माना जाता है. साल 2026 में भाद्रपद अमावस्या 11 सितंबर को मनाई जाएगी. इसे कुशाग्रहणी अमावस्या और पिठोरी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भाद्रपद अमावस्या के दिन पितरों का तर्पण करने से उन्हें तृप्ति मिलती है और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है. ऐसी भी मान्यता है कि तर्पण और दान-पुण्य जैसे धार्मिक कार्यों से पितृ दोष से मुक्ति की कामना की जाती है. अगर आप भी इस दिन पितरों का तर्पण करना चाहते हैं, तो इसे किस तरह किया जाता है, आइए 7 आसान स्टेप में जानते हैं…
भाद्रपद अमावस्या पर इन 7 स्टेप में करें पितरों का तर्पण
1. सबसे पहले करें स्नान
भाद्रपद अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और इसके बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें. धार्मिक परंपरा में तर्पण से पहले शरीर और मन की शुद्धता का विशेष ध्यान रखने की बात कही जाती है.
2. तर्पण के लिए तैयार करें जल
सबसे पहले तांबे, स्टील या मिट्टी का कोई साफ पात्र लें और उसे अच्छी तरह धो लें. इसके बाद उसमें जल भरें. इसमें गंगाजल की कुछ बूंदें डालें. फिर जल में कच्चा दूध और काले तिल मिलाएं.
3. दक्षिण दिशा की ओर मुख करके दें तर्पण
अब जल, दूध और काले तिल से भरे पात्र को बाएं हाथ में लें और दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें. इसके बाद दाहिने हाथ की तर्जनी उंगली और अंगूठे के बीच के हिस्से से पितरों को तर्पण अर्पित करने की धार्मिक परंपरा बताई गई है.
4. तर्पण के समय पितरों का करें स्मरण
तर्पण करते समय अपने सभी पितरों का श्रद्धापूर्वक स्मरण करें. जिस भाव और श्रद्धा से आप तर्पण कर रहे हैं, उस दौरान पितरों को याद करना इस धार्मिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है.
5. करें पितृ मंत्रों का जाप
तर्पण के दौरान पितरों के निमित्त मंत्रों का जाप भी किया जा सकता है. इस दौरान ‘ॐ सर्व पितृ देवाय नम:’ और ‘ॐ पितृभ्यो नमः’ मंत्र का जाप करने की परंपरा बताई गई है.
6. पितरों से मांगें क्षमा
तर्पण पूरा करने के बाद हाथ जोड़कर अपने पितरों का स्मरण करें और जाने-अनजाने हुई गलतियों के लिए उनसे क्षमा मांगें. धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दौरान श्रद्धा और विनम्रता का भाव रखना महत्वपूर्ण माना जाता है.
7. अंत में अपनी क्षमता के अनुसार करें दान
तर्पण के बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र, तिल और धन आदि का दान करें. धार्मिक परंपराओं में अमावस्या के दिन दान-पुण्य को भी विशेष महत्व दिया जाता है.
पितरों का तर्पण करने से क्या लाभ माना जाता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृ पक्ष के अलावा भाद्रपद अमावस्या के दिन भी पितरों का तर्पण करना शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इससे पितरों की आत्मा को तृप्ति मिलती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है. ऐसा भी माना जाता है कि पितरों का तर्पण करने से पितृ दोष से मुक्ति की कामना की जा सकती है और जीवन में आने वाली परेशानियों से राहत के लिए यह धार्मिक उपाय किया जाता है. तर्पण के साथ दान-पुण्य और पितरों का स्मरण करने की परंपरा भी जुड़ी हुई है. भाद्रपद अमावस्या के दिन पितरों को प्रसन्न करने के लिए किए जाने वाले अन्य धार्मिक उपायों की जानकारी भी अलग-अलग परंपराओं में मिलती है. इन्हें श्रद्धा और अपनी क्षमता के अनुसार किया जाता है.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई सामान्य मान्यताओं और ज्योतिष गणनाओं पर आधारित है. The Printlines इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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