New Delhi: हाल ही में खुद को पाकिस्तान का हिस्सा मानने से इनकार करते हुए बलूचिस्तानियों ने अपनी आजादी की तारीख घोषित करके स्वतंत्रता दिवस मनाया था. इसके साथ ही खुद को एक अलग वतन की तरह मानकर चल रहे हैं. इसी बीच, इससे भड़की हुई पाकिस्तानी हुकूमत अब जुल्म ढाने पर उतर आई है. एक तरफ तो लोगों पर सेना ने एफ-16 से बम बरसा दिए थे, वहीं दूसरी तरफ अब खुजदार शहर में लॉकडाउन का ऐलान कर दिया है.
घर से बाहर निकलने की मनाही
पुलिस ने अगले आदेश तक सख्ती से इसे लागू कर दिया है. नागरिकों को बिना जरूरी काम के घर से बाहर निकलने की मनाही है और पुलिस ने चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई होगी. इस लॉकडाउन से आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी ठप हो गई है. बाजार बंद हैं, आने-जाने की सुविधाएं बंद हो गई हैं, जिसकी वजह से आवश्यक सामान जुटाने में भी लोगों को दिक्कत हो रही है. सैन्य बलों ने खुजदार के अलावा खारान, जेहरी, कालात, मूला और जियारत जैसे कई इलाकों में जमीनी और हवाई अभियान बढ़ा दिए हैं.
फौज के साथ ड्रोन और हेलीकॉप्टर भी सक्रिय
खारान जिले के लिज्जे इलाके में जमीनी फौज के साथ ड्रोन और हेलीकॉप्टर भी सक्रिय हैं. इन अभियानों में एक किसान की ड्रोन हमले में मौत हो गई, जबकी अन्य नागरिक हताहतों की भी खबरें आई हैं, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है. सेना का कहना है कि वे संदिग्ध उग्रवादियों को निशाना बना रहे हैं, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि आम नागरिक भी प्रभावित हो रहे हैं.
BLA ने ली 38 हमलों की जिम्मेदारी
विद्रोही संगठन बलूच लिबरेशन आर्मी ने अपनी गतिविधियों को तेज कर दिया है और संगठन ने एक सप्ताह में 38 हमलों की जिम्मेदारी ली और दावा किया कि उन्होंने पाकिस्तानी सेना के 32 जवानों को मार गिराया. एक प्रमुख 18 इंच की गैस पाइपलाइन को भी उड़ा दिया गया, जिससे क्वेटा और पांच अन्य जिलों में गैस सप्लाई बाधित हो गई. इससे पहले से संसाधनों को लेकर नाराज जनता की तकलीफ और बढ़ गई है. बीएलए ने पूरे प्रांत में ब्लैक डे का आह्वान कर बहिष्कार भी लागू किया, जिसके चलते सुरक्षा बल हाई अलर्ट पर हैं.
बुनियादी मानवाधिकारों की मांग
पूरे इलाके में संचार और इंटरनेट सेवाएं कई जगह काट दी गई हैं, जिससे लोग बाहर की दुनिया से कटे हुए महसूस कर रहे हैं. हालांकि अब भी युवा, मध्यम वर्गीय नागरिक और महिलाएं बड़े पैमाने पर शांतिपूर्ण धरने और आंदोलन कर रही हैं. बलूच यकजहती कमेटी जैसे संगठनों ने मुख्य सड़कों को जाम कर लापता व्यक्तियों का हिसाब, सैन्य कार्रवाइयों पर रोक और बुनियादी मानवाधिकारों की मांग की है.
प्रदर्शनों को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग
सरकार की तरफ से इन प्रदर्शनों को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग, गिरफ्तारियां और फायरिंग की खबरें आई हैं, जिससे लोगों का गुस्सा और बढ़ा है. बलूच लोग अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील कर रहे हैं कि वे यहां हो रहे मानवाधिकार उल्लंघन पर बोलें और उन्हें एक देश के तौर पर मान्यता दें.
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