Dhaka: बांग्लादेश में नया राजनीतिक सफर शुरू होने जा रहा है. तारिक रहमान के शपथ लेने के साथ ही बांग्लादेश में एक नया अध्याय जुड गया है. देश को 35 साल बाद पहला पुरुष प्रधानमंत्री मिला है.13वीं राष्ट्रीय संसद के नवनिर्वाचित सांसदों ने मंगलवार को शपथ ग्रहण किया. राजधानी ढाका स्थित संसद भवन के साउथ प्लाज़ा में आयोजित इस समारोह में मुख्य निर्वाचन आयुक्त AMM Nasir Uddin ने सांसदों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई.
आखिरी पुरुष PM थे काजी जफर
यह चुनाव ऐतिहासिक माना जा रहा है. 1988 में काजी जफर अहमद आखिरी पुरुष प्रधानमंत्री थे. 1990 के बाद से देश की सरकार दो महिला नेताओं-खालिदा जिया और शेख हसीना के नेतृत्व में रही है. करीब साढ़े तीन दशक बाद अब फिर से पुरुष नेतृत्व वाली सरकार बनी है. तारिक रहमान का कार्यकाल बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़ा पड़ाव माना जा रहा है.
भ्रष्टाचार-मुक्त सरकार देने का वादा
उन्होंने भ्रष्टाचार-मुक्त सरकार देने का वादा किया है. “साफ राजनीति” के साथ अब उन्हें एक समावेशी और मध्यमार्गी सरकार बनानी होगी, जो मानव अधिकार व्यवस्था पर ध्यान दे. रिपोर्टों के अनुसार, पार्टी के अंदर उनकी पकड़ काफी मजबूत है. उम्मीदवार चयन से लेकर गठबंधन की रणनीति तक, उन्होंने खुद नेतृत्व किया.
लोकतंत्र को मजबूत करना मुख्य लक्ष्य
हालांकि वे वंशवादी राजनीति से जुड़े परिवार से आते हैं, लेकिन उनके अनुसार उनका मुख्य लक्ष्य लोकतंत्र को फिर से मजबूत करना और जवाबदेह शासन व्यवस्था बनाना है. उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि देश तभी आगे बढ़ेगा जब लोकतंत्र का सही तरीके से पालन होगा. हम देश का पुनर्निर्माण करना चाहते हैं.
17 साल बाद अपने देश लौटे तारिक
तारिक रहमान 17 साल के निर्वासन के बाद हाल ही में अपने देश लौटे हैं. उन्होंने ढाका-17 और बोगुरा-6, दोनों सीटों से चुनाव लड़ा और दोनों पर जीत हासिल की. 60 साल के तारिक पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के सबसे बड़े बेटे हैं, जिनका पिछले दिसंबर में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था. उनके पिता पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान थे, जो BNP के संस्थापक थे.
सैन्य तख्तापलट के दौरान हत्या
जियाउर रहमान की 1981 में एक सैन्य तख्तापलट के दौरान हत्या कर दी गई थी, जिसके बाद खालिदा जिया ने राजनीति में प्रवेश किया. वह पहली बार 1991 में प्रधानमंत्री बनीं. तारिक रहमान 2018 में अपनी मां खालिदा जिया के जेल जाने के बाद से पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे थे. हालांकि, वह 2008 में इलाज के लिए लंदन चले गए थे और वहीं रहते हुए उन पर देश में कई आपराधिक मामले चले.
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