आर्थिक चिंताओं के बीच प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में भी गिरी बांग्लादेश की रैंकिंग: Report

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

World Press Freedom Index 2026: वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स 2026 में बांग्लादेश की स्थिति ने एक बार फिर मीडिया की आजादी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. 180 देशों की इस वैश्विक सूची में बांग्लादेश तीन पायदान नीचे खिसककर 152वें स्थान पर पहुंच गया है, जो यह संकेत देता है कि देश में पत्रकारिता का माहौल लगातार चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह गिरावट केवल अभिव्यक्ति की आजादी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर देश की अर्थव्यवस्था और संस्थागत स्थिरता पर भी साफ तौर पर देखने को मिल रहा है.

लगातार गिरती रैंकिंग

रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में बांग्लादेश 149वें स्थान पर था, लेकिन 2026 में यह तीन स्थान नीचे खिसक गया. ‘द बिजनेस स्टैंडर्ड’ ने स्थिति को “बहुत गंभीर” श्रेणी में बताया है, जो दर्शाता है कि मीडिया के लिए काम करने का माहौल पहले से ज्यादा कठिन हो गया है. 2024 में हुए तख्तापलट के बाद से देश में राजनीतिक और सामाजिक अस्थिरता बढ़ी है, जिसका सीधा असर मीडिया की स्वतंत्रता पर पड़ा है.

आजादी की उम्मीदें, लेकिन हालात जस के तस

रिपोर्ट में कहा गया है कि शेख हसीना के शासन के खत्म होने के बाद मीडिया को ज्यादा स्वतंत्रता मिलने की उम्मीद थी, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आई. इसके उलट, पत्रकारों और मीडिया संस्थानों को एक “न्यू नॉर्मल” का सामना करना पड़ा, जहां उन पर नए तरह के दबाव देखने को मिले. कुछ पत्रकारों और मीडिया संस्थानों को पूर्व शासन का समर्थक बताकर निशाना बनाया गया, जिससे निष्पक्ष पत्रकारिता करना और मुश्किल हो गया.

सियासी दबाव और घटती सहनशीलता

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि राजनीतिक दबाव के चलते मीडिया स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर पा रही है. आलोचना को स्वीकार करने की क्षमता में भी गिरावट आई है, जिससे स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता पर असर पड़ रहा है. सेंसरशिप, साइबर उत्पीड़न, खुफिया एजेंसियों का दबाव, अदालतों में मामलों के जरिए उत्पीड़न और सख्त कानून—ये सभी कारक मीडिया की स्वतंत्रता को सीमित कर रहे हैं

अर्थव्यवस्था पर भी असर

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रेस पर बढ़ती पाबंदियों का असर केवल लोकतांत्रिक मूल्यों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका सीधा प्रभाव अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है. पुराने अध्ययनों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रेस पर हमलों के कारण वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर में लगभग 1 से 2 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है. यह भी बताया गया कि जहां प्रेस ज्यादा स्वतंत्र होती है, वहां वित्तीय प्रणाली अधिक स्थिर रहती है और भ्रष्टाचार का स्तर कम होता है.

वैश्विक तुलना: कौन हैं आगे?

रिपोर्ट के अनुसार, नॉर्वे, नीदरलैंड्स, एस्टोनिया, डेनमार्क, स्वीडन और फिनलैंड जैसे देश प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में शीर्ष स्थानों पर हैं. इन देशों में मीडिया को अधिक स्वतंत्रता दी जाती है, जिसका सकारात्मक असर उनके प्रशासनिक ढांचे और आर्थिक स्थिरता पर भी दिखाई देता है. इन देशों में कम भ्रष्टाचार और मजबूत बैंकिंग सिस्टम भी इसी कारण से जुड़ा हुआ माना जाता है.

यह भी पढ़े: Bihar Cabinet Expansion: दीपक प्रकाश के अनोखे अंदाज़ ने खींचा ध्यान, जींस-शर्ट में ली मंत्री पद की शपथ

Latest News

भाजपा संगठन आधारित दल जिसमे कार्यकर्ता एवं विचारधारा महत्वपूर्ण: डॉ. दिनेश शर्मा

लखीमपुर में आयोजित भाजपा प्रशिक्षण अभियान कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद डॉ दिनेश शर्मा ने भाजपा को विचारधारा आधारित पार्टी बताते हुए संगठन, कार्यकर्ता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर विस्तार से बात की.

More Articles Like This

Exit mobile version