MEA Budget 2026: भारत की ‘नेबर फर्स्ट’ की पॉलिसी में दिखा अफगानिस्तान, पाक-बांग्लादेश रह गए पीछे

New Delhi:  केंद्र सरकार ने आगामी वित्त वर्ष के लिए विदेश मंत्रालय (MEA) के बजट में करीब 1,600 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की गई है. इसके लिए कुल 22,119 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं. बजट से भारत की नेबर फर्स्ट की पॉलिसी और क्षेत्रीय संतुलन को लेकर उसकी प्राथमिकताओं को देखने का मौका मिला है. बजट के आवंटन से साफ है कि जहां बांग्लादेश और मालदीव से जुड़े मामलों में कटौती की गई है.

अफगानिस्तान के लिए आवंटन में 50 करोड़ की बढ़ोतरी

वहीं अफगानिस्तान, नेपाल, भूटान और श्रीलंका के लिए मदद बढ़ाकर नई रणनीतिक दिशा दिखाई गई है. विदेश मंत्रालय के इस बजट से संकेत मिलता है कि भारत ने पड़ोस में प्रभावी संतुलन, मानवीय सहयोग और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा तीनों ही मोर्चों पर एक साथ कदम बढ़ाए हैं. अफगानिस्तान के लिए आवंटन में 50 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी कर कुल 150 करोड़ रुपये किया गया है. इसे क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है.

पाकिस्तान के लिए असहजता बढ़ाने वाली पहल

रणनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भारत की यह पहल पाकिस्तान के लिए असहजता बढ़ाने वाली है, क्योंकि काबुल में भारत की सक्रिय मानवीय और विकास के लिए मदद इस्लामाबाद की पारंपरिक रणनीति को चुनौती देती है. अफगानिस्तान में भारत की मौजूदगी बढ़ने से पाकिस्तान की क्षेत्रीय पकड़ पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है. दूसरी ओर बांग्लादेश से जुड़े मामलों के लिए आवंटन घटाकर 60 करोड़ रुपये कर दिया गया है.

मालदीव के लिए भी 50 करोड़ की कटौती

पिछले साल आवंटित 120 करोड़ रुपये का पूरा उपयोग न हो पाने के बाद यह कटौती की गई है. संकेत साफ हैं कि ढाका के साथ सहयोग अब सीमित दायरे में रखा जाएगा. मालदीव के लिए भी 50 करोड़ रुपये की कटौती कर कुल 550 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. नेपाल के लिए आवंटन बढ़ाकर 800 करोड़ रुपये कर दिया गया है जो पिछले साल से 100 करोड़ रुपये अधिक है. वहीं भूटान के लिए 2,288 करोड़ रुपये का बड़ा आवंटन किया गया है, जिससे भारत की वित्तीय मदद और विकास साझेदारी मजबूत होगी.

चीन की भी बढ़ जाएगी रणनीतिक टेंशन

नेपाल-भूटान में बढ़ा भारतीय निवेश उस समय आया है जब चीन इन देशों में निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के जरिए अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रहा था. भारत के इस कदम से चीन की भी रणनीतिक टेंशन बढ़ जाएगी. श्रीलंका के लिए भी आवंटन 100 करोड़ रुपये बढ़ाकर कुल 400 करोड़ रुपये किया गया है, जो आर्थिक संकट से उबर रहे कोलंबो के लिए अहम सहारा है.

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