Islamabad: पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में मुख्यमंत्री समेत प्रमुख नेताओं को मनमाने ढंग से हिरासत में लिया गया है. साथ ही इंटरनेट सेवाओं पर भी बैन लगा दिया गया है. वहीं अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इन खबरों पर गंभीर चिंता जताई है. संगठन ने संघीय सरकार की ओर से लगाए गए आपातकाल के दौरान प्रतिबंधों की आवश्यकता और उनके अनुपात पर भी सवाल उठाए हैं. इस बीच आपातकाल लागू होने के बाद प्रांत में राजनीतिक तनाव और सुरक्षा स्थिति बिगड़ने के बीच गवर्नर हाउस में आग लगा दी गई.
गवर्नर हाउस आग की लपटों में घिरा
सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में गवर्नर हाउस आग की लपटों में घिरा दिखाई दिया. अन्य वीडियो में प्रांत के विभिन्न शहरों में पुलिस की ओर से गोलीबारी और आंसू गैस के गोले दागे जाने के दृश्य सामने आए. पाकिस्तान की संघीय सरकार ने रविवार को प्रांत में आपातकाल घोषित करते हुए गवर्नर शासन लागू कर दिया था. इस फैसले के बाद जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के नेतृत्व वाली प्रांतीय सरकार को निलंबित कर दिया गया.
आपातकालीन उपायों के अनुपात पर गंभीर सवाल
एमनेस्टी इंटरनेशनल, दक्षिण एशिया के उपनिदेशक बाबू राम पंत ने आपातकाल की घोषणा और प्रांत में सशस्त्र बलों की तैनाती की निंदा की. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री समेत प्रमुख नेताओं की मनमानी हिरासत और पूरे प्रांत में इंटरनेट सेवाओं में बाधा की खबरें इन आपातकालीन उपायों के अनुपात पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं. उन्होंने कहा कि कुछ बेहद सीमित परिस्थितियों में जब कोई सार्वजनिक आपात स्थिति देश के अस्तित्व के लिए खतरा बन जाती है, तब सरकारें अपने मानवाधिकार संबंधी दायित्वों से अस्थायी रूप से हटने के उपाय कर सकती हैं.
सत्ता को केंद्रित करने का खुला अधिकार
हालांकि, आपातकालीन शक्तियां मानवाधिकारों के दमन, असहमति की आवाज दबाने या सत्ता को केंद्रित करने का खुला अधिकार नहीं देतीं. पंत ने चेतावनी दी कि सेना की तैनाती से खैबर पख्तूनख्वा का और अधिक सैन्यीकरण होने तथा बल के गैरकानूनी इस्तेमाल की आशंका बढ़ सकती है. उन्होंने आतंकवाद विरोधी अभियानों के दौरान जबरन गुमशुदगी और न्यायेतर हत्याओं के मामलों में सशस्त्र बलों के पुराने रिकॉर्ड का भी उल्लेख किया. उन्होंने पाकिस्तानी अधिकारियों से सामान्य कानून-व्यवस्था के लिए सैन्यकर्मियों का इस्तेमाल न करने और यह सुनिश्चित करने की अपील की कि सैन्य बल जवाबदेह बने रहें तथा अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों और मानकों का पालन करें.
आपातकालीन उपाय परिस्थितियों के लिहाज से हों
पंत ने कहा कि इस महत्वपूर्ण मोड़ पर संघीय अधिकारियों को आपातकाल के तहत की जाने वाली सभी कार्रवाइयों की स्वतंत्र निगरानी सुनिश्चित करनी चाहिए. साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि प्रत्येक आपातकालीन उपाय परिस्थितियों के लिहाज से हों. प्रांतीय सरकार निलंबित किए जाने के बाद खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी और मंत्रिमंडल के कई सदस्यों को हिरासत में ले लिया गया. पाकिस्तान के गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री तलाल चौधरी ने मीडिया से कहा कि नेताओं के खिलाफ लंबित कानूनी मामलों में आरोप तय किए जाएंगे और मुकदमा चलाया जाएगा.
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