China birth rate decline: चीन इस समय जनसंख्या में लगातार आ रही गिरावट से चिंतित है. चीन की जन्मदर ऐतिहासिक रूप से सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है. ऐसे में वहां काम करने वाली आबादी घट रही है और बुजुर्गो की संख्या तेजी से बढ़ रही है. चीन में 60 साल से ऊपर के लोग अभी कुल आबादी का करीब 23% हैं और सदी के अंत तक यह आधे से ज्यादा हो सकते हैं. यानी काम करने वालों की संख्या कम और पेंशन लेने वालों की संख्या ज्यादा है.
हालांकि चीनी सरकार बच्चों के लिए नकद प्रोत्साहन, टैक्स छूट और शादी के नियम आसान करने जैसे कई कदम उठा चुकी है, लेकिन असर सीमित रहा है. ऐसे में अब सवाल ये है कि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक चीन क्या आने वाले दशकों में बड़े आर्थिक संकट का सामने करेगा? इसी कड़ी में अब बीजिंग की नजर एक नए समाधान पर है- रोबोट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI). आइए इसे विस्तार से समझते हैं.
रोबोट बनेंगे नई ताकत?
CNN के मुताबिक, चीन पहले से ही दुनिया का सबसे बड़ा औद्योगिक रोबोट बाजार है. साल 2024 में दुनिया भर में लगाए गए आधे से ज्यादा रोबोट चीन में स्थापित हुए. कई फैक्ट्रियों में अब डार्क फैक्ट्री मॉडल अपनाया जा रहा है, अर्थात जहां मशीने खुद काम करती हैं और इंसानों की जरूरत कम होती है. चीनी सरकार ने 2015 में मेड इन चाइना-2025 योजना शुरू की थी, जिसका मकसद देश को हाई टेक ताकत बनाना था. अब यही योजना जनसंख्या संकट से निपटने का जरिया भी बन रही है.
आर्थिक ताकत रहेगी बरकरार?
रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने 2024 में पहली बार रिटायरमेंट उम्र बढ़ाई है. साथ ही पेंशन सुधार और स्किल डेवलपमेंट पर भी जोर दिया जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि टेक्नोलॉजी की रफ्तार जनसंख्या गिरावट से तेज रही, तो चीन अपनी आर्थिक ताकत बरकरार रख सकता है.
ये रोबोट सिर्फ फैक्ट्रियों में ही नहीं, बल्कि सरकार की ये सोच है कि रोबोर्ट बुजुर्गो की देखभाल करने में भी मदद करें. दरअसल, AI आधारित केयर सिस्टम, ह्यूमनॉइड रोबोट, एक्सोस्केलेटन और मसल सूट जैसी तकनीकों पर काम हो रहा है, जिससे बुजुर्गों को सहारा मिल सके.
खतरे भी कम नहीं…
CNN की रिपोर्ट के अनुसार, ऑटोमेशन लंबी अवधि में मदद कर सकता है, लेकिन छोटी अवधि में नौकरियां प्रभावित हो सकती है. कुछ अनुमान बताते हैं कि चीन के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के 70% तक काम पर AI और रोबोट का असर पड़ सकता है. यानी एक तरफ श्रमिकों की कमी है तो दूसरी तरफ बेरोजगारी भी चिंता का विषय है.
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