ताइवान को जहाज, एयरक्राफ्ट और सैनिकों से घेर रहा चीन, क्या है ड्रैगन का प्लान जिसे लेकर अमेरिका हुआ अलर्ट

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

China military drills : ताइवान में नई सरकार बनने पर चीन बौखलाया हुआ है. ऐसे में उसने ताइवान के आसपास के इलाकों में अब का अपना सबसे व्‍यापक सैन्‍य अभ्‍यास शुरू कर दिया है. ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि क्या ताइवान को लेकर चीन कोई बड़ी चाल चलने वाला है? वहीं, अमेरिका के इंडो-पैसिफिक कमांड के डिप्टी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल स्कलेंका ने बताया कि चीन फिर से ताइवान के पास युद्धाभ्यास कर रहा है, जिसका लक्ष्य ताइवान पर कब्जा करना है.

युद्धाभ्यास को लेकर चीन ने क्या कहा?  

दरअसल, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के पूर्वी थिएटर कमांड ने बताया कि ताइवान के करीब चीन अपनी नौसेना और वायु सेना की ताकत का परीक्षण कर रहा है. बता दें कि चीन ने अलगाववादी गतिविधियों को अंजाम देने वाली ताकतों को जवाब देने के लिए इस युद्धाभ्यास की शुरुआत की है. चीन ने यह युद्धाभ्यास ताइवान स्ट्रेट, उत्तर, दक्षिण और पूर्वी ताइवान और उसके आसपास के ताइवान के नियंत्रण वाले द्वीपों किन्मेन, मात्सू, वुकिउ और डोंगयिन में शुरू किया है.

चीन ने अमेरिका को दी धमकी

चीन के अलगाववादी गतिविधियों को अंजाम देने वाली ताकतों का मतलब अमेरिका जैसे देशों से है. क्‍योंकि चीनी सेना ने हाल ही में कहा था कि ताइवान के आसपास उसका दो दिवसीय अभ्यास स्वतंत्रता चाहने वाली अलगाववादी ताकतों के लिए सजा है. चीन का दावा है कि ताइवान उसके राष्ट्रीय क्षेत्र का हिस्सा है. इजना ही नहीं उसने ये भी कहा है कि जरूरत पडने पर वह ताइवान पर नियंत्रण करने के लिए वह बल का भी प्रयोग कर सकता है.

ताइवान ने युद्धाभ्यास पर जताई चिंता

वहीं चीन के युद्धाभ्यास पर चिंता जाहिर करते हुए ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि उन्होंने ताइवान स्ट्रेट के आसपास अपनी सेनाओं को भेज दिया है, जिससे अपने क्षेत्र की रक्षा की जा सके. चीन के इस युद्धाभ्यास से न केवल ताइवान स्ट्रेट की शांति और स्थिरता बाधित होगी बल्कि चीन की सैन्यवादी मानसिकता का भी पता चलता है.

ताइवान के नए राष्ट्रपति ने की शांति की पहल

सोमवार को लाई चिंग ते ने ताइवान के नए राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली है. चिंग ते को चीन का कट्टर विरोधी माना जाता है. वहीं, ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने बीजिंग से अपनी सैन्य धमकी को रोकने का आह्वान किया. उन्होंने कहा था कि ताइवान ना तो चीन के आगे झुकेगा और ना ही चीन को उकसाएगा. उन्‍होंने चीन के साथ बातचीत के माध्‍यम से इन मुद्दों का हल निकालने की बात कही है.

ताइवान के साथ खड़ा है जापान

वहीं, जापान ने भी चीन के इस हरकत पर चिंता जाहिर की है. ताइवान की आजादी की वकालत करते हुए जापान के विदेश मंत्री योको कामिकावा ने कहा “ताइवान हमारा बेहद महत्वपूर्ण साझेदार है, हमारे करीबी आर्थिक संबंध और लोगों का आदान-प्रदान है और यह हमारा बहुमूल्य मित्र है.”

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