अब समुद्र में भी अमेरिका को चुनौती देगा चीन, फुजियान एयरक्राफ्ट कैरियर बनकर तैयार

New Delhi: चीन समुद्र में अमेरिकी दादागिरी को चुनौती देने की स्थिति में पहुंच गया है. चीन ब्‍लू वॉटर नेवी के सपने को साकार करने की दिशा में लगातार कदम बढ़ा रहा है. कुछ महीने पहले चीन की ओर से फुजियान एयरक्राफ्ट कैरियर लॉन्‍च किया गया था. इसमें कई अटैक और डिफेंस सिस्‍टम इंटीग्रेट किए गए हैं, जो किसी भी तरह के सबमरीन अटैक को नाकाम करने में सक्षम है.

अमेरिका के लिए बड़ा चैलेंज

फुजियान विमानवाहक पोत में लगे वेपन सिस्‍टम अमेरिकी पनडुब्‍बी के हमले को भी नाकाम कर सकता है. फुजियान में लगा एंटी टॉरपीडो टॉरपीडो (ATT) भविष्‍य में अमेरिका के लिए बड़ा चैलेंज साबित हो सकता है. चीन अपनी नौसैनिक ताकत को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. इसी क्रम में उसका सबसे आधुनिक विमानवाहक पोत ‘फुजियान’ ऐसी एक्टिव टॉरपीडो-रोधी प्रणाली से लैस हो सकता है, जो दुश्मन के टॉरपीडो को समुद्र के भीतर ही नष्ट करने में सक्षम होगी.

दुनिया का पहला एयरक्राफ्ट कैरियर

यदि ऐसा होता है तो फुजियान दुनिया का पहला एयरक्राफ्ट कैरियर बन जाएगा, जिस पर इस तरह की ‘हार्ड-किल’ अंडरवॉटर डिफेंस सिस्‍टम तैनात होगा. यह कदम चीन की बढ़ती समुद्री महत्वाकांक्षाओं के साथ-साथ अमेरिकी नेवी की अत्याधुनिक परमाणु पनडुब्बियों से पैदा होने वाले खतरे का सीधा जवाब है. चीन का मानना है कि आधुनिक भारी टॉरपीडो बड़े युद्धपोतों के लिए एंटी-शिप मिसाइलों से भी अधिक घातक साबित हो सकते हैं.

चीन का तीसरा और पूरी तरह स्वदेशी डिजाइन वाला एयरक्राफ्ट

रिपोर्ट के अनुसार, फुजियान चीन का तीसरा और पूरी तरह स्वदेशी डिजाइन वाला एयरक्राफ्ट कैरियर है. इसमें पारंपरिक 12 ट्यूब डेप्थ चार्ज लॉन्चर की जगह 6 ट्यूब वाला 324 mm का हल्का टॉरपीडो लॉन्चर लगाया गया है. माना जा रहा है कि यही लॉन्चर सक्रिय एंटी टॉरपीडो वेपन सिस्‍टम का हिस्सा होगा. यह सिस्‍टम ब्रॉडबैंड सोनार की मदद से टॉरपीडो और डिकॉय में अंतर कर सकती है.

शक्तिशाली शॉकवेव तकनीक का इस्तेमाल

इसके बाद उच्च क्षमता वाले पंप जेट थ्रस्टर के जरिए इंटरसेप्टर टॉरपीडो महज तीन सेकंड में 50 से 60 नॉट की रफ्तार पकड़ लेता है और दुश्मन के टॉरपीडो का पीछा करता है. टारगेट को नष्ट करने के लिए इसमें गाइडेड एक्‍सप्‍लोसिव और शक्तिशाली शॉकवेव तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है. भविष्य में इसमें सुपरकैविटेशन तकनीक जुड़ने पर इसकी गति 200 नॉट तक पहुंच सकती है.

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