New Delhi: दक्षिण चीन सागर में एक बार फिर चीन और फिलीपींस के बीच तनाव बढ़ गया है. यहां पिछले कुछ महीनों में तनाव तेजी से बढ़ा है. खास बात यह है कि अब फिलीपींस के पास भारत की दी हुई बनी ब्रह्मोस सुपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल भी है. ब्रह्मोस को उसने अपने तटों की सुरक्षा में तैनात किया है. ऐसे में चीन और फिलीपींस के बीच समुद्री टकराव सिर्फ जहाजों की भिड़ंत तक सीमित नहीं रह गया है. ताजा तनाव अब फिलीपींस के आरोपों से बढ़ा है.
सैनिकों तक जरूरी सामान पहुंचाने के लिए था
फिलीपींस का कहना है कि हाल ही में चीनी नौसेना और कोस्ट गार्ड ने उसके नियमित रोटेशन और सप्लाई मिशन को रोक दिया. यह मिशन सेकेंड थॉमस शोल में मौजूद उसके सैनिकों तक जरूरी सामान पहुंचाने के लिए था. फिलीपींस के मुताबिक चीनी जहाजों ने खतरनाक तरीके से रास्ता रोका, जिसके बाद मिशन को अस्थायी तौर पर रोकना पड़ा. विवाद का केंद्र सेकेंड थॉमस शोल है. यहां फिलीपींस ने 1999 में अपने पुराने युद्धपोत BRP सिएरा माद्रे को जानबूझकर जमीन पर उतार दिया था.
समय-समय पर सैनिकों और सामान की सप्लाई
फिलीपींस इसी जहाज पर अपने सैनिक रखता है और समय-समय पर वहां सैनिकों और सामान की सप्लाई करता है. चीन इस इलाके पर अपना दावा करता है और फिलीपींस की मौजूदगी का विरोध करता है. इसी वजह से दोनों देशों के जहाज यहां आमने-सामने आते रहे हैं. जुलाई में भी यहां दोनों पक्षों के बीच जबरदस्त झड़प हुई थी. चीनी और फिलीपीनी जवानों के बीच लाठी और डंडों से मारपीट तक हुई थी और एक फिलीपीनी सैनिक के सिर पर गंभीर चोट आई थी.
एंटी-शिप मिसाइल सिस्टम खरीदा
इसके बाद सितंबर में भी दोनों देशों के जहाजों के बीच टकराव की घटनाएं सामने आईं. यानी दक्षिण चीन सागर में तनाव फिर बढ़ता दिख रहा है. फिलीपींस ने भारत से ब्रह्मोस सुपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल सिस्टम खरीदा है. 2022 में करीब 37.5 करोड़ डॉलर का सौदा हुआ था और 2024 में पहली खेप फिलीपींस पहुंची. इस मिसाइल की अधिकतम रेंज करीब 290 किलोमीटर बताई जाती है. अब फिलीपींस की मरीन कोर अपने तटीय रक्षा ढांचे में ब्रह्मोस को शामिल कर रही है.
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