China Taiwan Relation : चीन और ताइवान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ी कूटनीतिक हलचल देखने को मिली है. बता दें कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बीजिंग में ताइवान की विपक्षी पार्टी कुओमिन्तांग (KMT) की नेता चेंग ली-वुन से मुलाकात की है. साथ ही इस बैठक में एक बार फिर शी जिनपिंग ने ताइवान को लेकर चीन के पुराने रुख को दोहराते हुए ‘एकजुटता’ और ‘एक परिवार’ की बात कही. रिपोर्ट के मुताबिक, बीजिंग में यह बैठक ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में आयोजित की गई.
इस मुलाकात के दौरान बैठक में राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने चेंग ली-वुन से कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि चीनी और ताइवानी लोग एकजुट होंगे. साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि ताइवान स्ट्रेट के दोनों तरफ के लोग चीनी हैं और संबंधों का भविष्य चीनी जनता के हाथों में है.
चीन ताइवान पर बना सैन्य दबाव
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, ताइवान की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी कुओमिन्तांग (KMT) की अध्यक्ष चेंग ली-वुन इस समय चीन के दौरे पर हैं. बता दें कि उन्होंने इस यात्रा को ‘शांति मिशन’ बताया है. बता दें कि दोनों देशों के बीच नेताओं के इस बातचीत को तनाव कम करना बताया जा रहा है, खासतौर पर ऐसे समय में जब चीन ताइवान पर सैन्य दबाव बढ़ा रहा है.
बातचीत के जरिए संबंध सुधारने की आवश्यकता
इसके साथ ही इस बैठक में शी जिनपिंग ने ये भी कहा कि आज की दुनिया पूरी तरह शांतिपूर्ण नहीं है. इस दौरान देश के हालात को देखते हुए उनका मानना है कि ऐसे समय में शांति बेहद महत्वपूर्ण है. उन्होंने बातचीत के जरिए संबंध सुधारने की आवश्यकता पर भी जोर दिया.
‘एक चीन नीति’ पर जोर: चीन का दावा
मीडिया रिपोर्ट का कहना है कि चीनी राष्ट्रपति ने दोहराया कि ताइवान स्ट्रेट के दोनों ओर के लोग एक ही परिवार के सदस्य हैं. जानकारी के मुताबिक, यह बयान चीन की ‘एक चीन नीति’ को फिर से मजबूत करने के तौर पर देखा जा रहा है.
अमेरिका ताइवान का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय समर्थक
प्राप्त जानकारी के अनुसार इस बीच अमेरिका ने ताइवान के साथ औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं होने के बावजूद उसका समर्थन जारी रखा है. बता दें कि अमेरिका ताइवान का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय समर्थक और हथियार आपूर्तिकर्ता माना जाता है. इस दौरान बीजिंग ने बार-बार वाशिंगटन से ताइवान को हथियार देने पर रोक लगाने की मांग की है.
चीन के विरोध में ताइवान की मौजूदा सरकार
इतना ही नही बल्कि ताइवान की मौजूदा सरकार चीन के विरोध में है. साथ ही साल 2023 में दोनों देशों के बीच लंबे समय तक तनाव की स्थिति बनी रही थी. चीन लगातार ताइवान स्ट्रेट के आसपास सैन्य गतिविधियां और दबाव बढ़ाता रहा है, जिसकी वजह से क्षेत्र में तनाव और गहरा गया है.
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