गिरा नदियों का जलस्तर, बंद करना पड़ा न्यूक्लियर प्लांट…लगातार सिकुड़ती जा रही यूरोप की गंगा, बढ़ा पर्यावरणीय खतरा

Aarti Kushwaha
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Danube River : यूरोप की दूसरी सबसे लंबी नदी डेन्यूब (Danube River) जिसे यूरोप की जीवनरेखा कहा जाता है और जो 10 देशों की प्यास बुझाने के साथ करोड़ों लोगों की आजीविका का आधार है, आज वही नदी सिकुड़ती नजर आ रही है. नदी जल स्तर इतना गिर गया है कि जहाजों का संचालन प्रभावित हो रहा है, कृषि संकट गहरा रहा है साथ ही कई हिस्सों में पर्यावरणीय खतरा बढ़ा हुआ है.

इतना ही नहीं, इसके सूखने की वजह से हंगरी को अपना न्यूक्लियर प्लांट भी बंद करना पड़ गया है. इसकी वजह प्लांट के रिएक्टर को कूल करने जितने पानी की जरूरत है, वो पूरी नहीं हो पा रही है. हंगरी को पिछले 44 साल में पहली बार ऐसा कदम उठाना पड़ा है. यही वजह है कि पूरी दुनिया में डेन्यूब नदी को लेकर चिंता जताई जा रही है.

डेन्यूब को क्यों कहते हैं यूरोप की गंगा?

बता दें कि जिस तरह भारत में गंगा नदी करोड़ों लोगों के जीवन, कृषि, संस्कृति और अर्थव्यवस्था का आधार है, वैसे ही यूरोप में डेन्यूब नदी का महत्व है. डेन्यूब जर्मनी के ब्लैक फॉरेस्ट  से निकलती है और रोमानिया और यूक्रेन के बीच स्थित डेन्यूब डेल्टा से होते हुए काला सागर में गिरती है. डेन्यूब दुनिया की सबसे ज्यादा देशों से गुजरने वाली प्रमुख नदियों में शामिल है. यह नदी मध्य और पूर्वी यूरोप के 10 देशों से होकर गुजरती है., ऑस्ट्रिया, स्लोवाकिया, हंगरी, क्रोएशिया, सर्बिया, बुल्गारिया, रोमानिया, मोल्दोवा और यूक्रेन.इसके जलग्रहण क्षेत्र का प्रभाव 19 देशों तक फैला हुआ है. ये पीने के पानी, सिंचाई, जल परिवहन, मत्स्य पालन और पर्यटन के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है.

गंगा और डेन्यूब में अंतर

यदि दोनों नदियों की तुलना करें तो गंगा लंबाई के मामले में डेन्यूब से पीछे है. गंगा नदी की कुल लंबाई लगभग 2525 किलोमीटर है. जबकि डेन्यूब नदी की कुल लंबाई लगभग 2850 किलोमीटर है.

आखिर सूखे की शिकार क्यों बनी डेन्यूब?

दरअसल, आल्प्स माउंटेन के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं. सिकुड़ रहे हैं. शुरुआती वर्षों में इससे पानी बढ़ता है, लेकिन लंबे समय में नदियों को मिलने वाला स्थायी जल कम हो जाता है.

डेन्यूब नदी सूखने से समस्याएं

  • बड़े मालवाहक जहाज पूरी क्षमता से नहीं चल पा रहे.
  • कृषि के लिए सिंचाई का संकट बढ़ रहा है.
  • कई शहरों में पेयजल प्रबंधन पर दबाव बढ़ा है.
  • मछलियों और जलीय जीवों का प्राकृतिक आवास प्रभावित हो रहा है.
  • टूरिज्म इंडस्ट्री को भी नुकसान पहुंच रहा है.
  • हंगरी को न्यूक्लियर प्लांट बंद करना पड़ा. बिजली आपूर्ति का संकट.
  • कई जगहों पर नदी पूरी तरह सूखने नाव सेवाएं नहीं चल पा रही.

जलवायु परिवर्तन का भारत और दुनिया की बड़ी नदियों पर असर

बता दें कि डेन्यूब का संकट सिर्फ यूरोप की समस्या नहीं है. यह पूरी दुनिया के लिए चेतावनी है कि यदि जलवायु परिवर्तन की रफ्तार नहीं थमी तो गंगा, ब्रह्मपुत्र, सिंधु और अन्य बड़ी नदियां भी भविष्य में इसी तरह की चुनौतियों का सामना कर सकती हैं. जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, भूजल प्रबंधन और कार्बन उत्सर्जन में कमी जैसे कदम अब केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि जल सुरक्षा का भी सवाल बन चुके हैं.
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