ट्रंप के खिलाफ 70 से अधिक सांसदों ने खोला मोर्चा, ईरान को लेकर विवादास्पद बयान से मचा महासंग्राम

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Washington: ट्रंप के ईरान को लेकर दिए गए विवादास्पद बयान के बाद अमेरिका समेत पूरी दुनिया में हलचल मच गई. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान की पूरी सभ्यता को खत्म करने की धमकी दी थी, जिसके बाद संयुक्त राष्ट्र ने भी बिना नाम लिए कड़ा एतराज जताया. इसी बीच अमेरिका में उन्हें राष्ट्रपति पद से हटाने की मांग जोर पकड़ने लगी है. ट्रंप की इस टिप्पणी के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी के 70 से अधिक सांसदों और सीनेटरों ने एकजुट होकर उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.

युद्धविराम के बावजूद ट्रंप का बयान अक्षम्य

विवाद बढ़ता देख, समय सीमा खत्म होने से ठीक 90 मिनट पहले ट्रंप ने घोषणा की कि वह ईरान पर हमलों को दो सप्ताह के लिए टाल रहे हैं और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय युद्धविराम हो गया है. हालांकि, सांसदों का कहना है कि युद्धविराम के बावजूद ट्रंप का बयान अक्षम्य है. अमेरिकी सांसद सेठ मौल्टन ने कहा कि अस्थायी युद्धविराम हो या न हो, ट्रंप ने पहले ही महाभियोग चलाने योग्य अपराध कर दिया है. उन्हें और नुकसान पहुंचाने से पहले हटाना जरूरी है.

मानसिक और नैतिक रूप से फिट नहीं हैं ट्रंप 

सांसदों का कहना है कि ट्रंप अब शासन करने के लिए मानसिक और नैतिक रूप से फिट नहीं हैं. मंगलवार को ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘Truth Social’ पर ईरान को चेतावनी देते हुए लिखा कि यदि तेहरान (ईरान) निर्धारित समय सीमा (डेडलाइन) तक समझौता नहीं करता, तो एक पूरी सभ्यता खत्म हो सकती है. इस बयान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध अपराध की धमकी के रूप में देखा गया.

25वें संशोधन का उपयोग

सीनेटर क्रिस मर्फी और एड मार्की सहित कई सांसदों ने मांग की है कि ट्रंप की कैबिनेट को 25वें संशोधन का उपयोग करना चाहिए. यह कानून कैबिनेट को शक्ति देता है कि यदि राष्ट्रपति अपने कर्तव्यों का पालन करने में असमर्थ हो, तो उसे पद से हटाया जा सकता है. सांसदों का तर्क है कि यदि कैबिनेट कदम नहीं उठाती तो कांग्रेस को ट्रंप पर तीसरी बार महाभियोग चलाकर उन्हें दोषी ठहराना चाहिए.

अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन

ट्रंप के बयान पर संयुक्त राष्ट्र ने भी बिना नाम लिए कड़ा एतराज जताया. UN के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने स्पष्ट किया कि किसी भी सैन्य उद्देश्य के लिए नागरिकों की बुनियादी सुविधाओं को नष्ट करना या पूरी सभ्यता को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय नियमों (जिनेवा कन्वेंशन) का उल्लंघन है.

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