ट्रंप के तंज से मचा बवाल, अपमानजनक शब्द पर छीड़ी बहस. क्या भारत को भी बना दिया “थर्ड वर्ल्ड कंट्रीज़”?

Washington: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर आव्रजन (इमिग्रेशन) के मुद्दे पर अपने सख्त रुख को दोहराते हुए “थर्ड वर्ल्ड कंट्रीज़” शब्द का इस्तेमाल कर वैश्विक बहस छेड़ दिया है. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच पर लिखा, “यदि आप तीसरी दुनिया से लोगों को आयात करते हैं, तो आप स्वयं तीसरी दुनिया बन जाते हैं. यदि आप विकासशील देशों से बड़े पैमाने पर लोगों को लाते हैं, तो जल्द ही आपका देश भी तीसरी दुनिया जैसा बन जाएगा. अमेरिका को फिर से महान बनाओ.”

अमेरिका में अवैध आव्रजन

यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका में अवैध आव्रजन, सीमा सुरक्षा और शरणार्थी नीतियों को लेकर राजनीतिक माहौल बेहद गर्म है. इसके बाद सवाल उठने लगे कि आखिर “थर्ड वर्ल्ड” शब्द का मतलब क्या है, क्या इसमें भारत जैसे देशों को भी शामिल किया जाता है और क्यों आज दुनिया के कई विशेषज्ञ इस शब्द को अपमानजनक और पुराना मानते हैं.

शीत युद्ध के दौर में इस्तेमाल

“तीसरी दुनिया” (Third World) शब्द मूल रूप से शीत युद्ध के दौर में उन देशों के लिए इस्तेमाल किया जाता था जो न तो अमेरिकी गुट में थे और न ही सोवियत गुट में. हालांकि आज आम बोलचाल में इसका उपयोग आर्थिक रूप से कम विकसित या विकासशील देशों के लिए किया जाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह शब्द शीत युद्ध के दौर का है और आज कई लोग इसे पुराना, भ्रामक और अपमानजनक मानते हैं.

शब्दों को अधिक उपयुक्त

इसके स्थान पर “विकासशील देश” या “उभरती अर्थव्यवस्था” जैसे शब्दों को अधिक उपयुक्त माना जाता है. ट्रंप के समर्थकों का कहना है कि उनका इशारा उन देशों से बड़े पैमाने पर होने वाले अवैध या अनियंत्रित आव्रजन की ओर था, जिससे सामाजिक सेवाओं, रोजगार और सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव पड़ सकता है. वहीं आलोचकों का आरोप है कि इस तरह की भाषा विकासशील देशों और वहां से आने वाले प्रवासियों के प्रति नकारात्मक छवि पेश करती है तथा समाज में विभाजन को बढ़ावा देती है.

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