पर्यावरण को चुकानी पड़ रही अमीरों के शौक की कीमत, क्या है इस समस्या का समाधान?

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
Environment: दुनिया के सबसे अमीर लोग अक्सर अपनी लग्जरी लाइफस्टाइल और यात्रा के लिए प्राइवेट जेट का इस्तेमाल करते हैं, जिनकी कीमत पर्यावरण को चुकानी पड़ रही है. ऐसे में अमेरिका स्थित ‘इंस्टिट्यूट फॉर पॉलिसी स्टडीज’ (IPS) की रिपोर्ट में इस बात पर गहरी चिंता जताई गई है कैसे प्राइवेट एविएशन सेक्टर तेजी के साथ बढ़ रहा है और इसके वजह से होने वाला कार्बन का एमिशन दुनिया में जलवायु मिशन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है.

प्राइवेट जेट्स का भारी कार्बन फुटप्रिंट

इस दौरान समस्या बिल्कुल साफ है कि प्राइवेट जेट भारी मात्रा में ईंधन जलाते हैं. हालांकि कमर्शियल उड़ानों की अपेक्षा इनमें बहुत कम यात्री होते हैं, जिसके कारण प्रति यात्री कार्बन उत्सर्जन बहुत अधिक होता है. इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन (ICCT) के अनुसार, साल 2023 में प्राइवेट जेट्स ने करीब 1.95 करोड़ टन ग्रीनहाउस गैसों का प्रोडक्शन किया था.
  • एमिशन में भारी उछाल: एक अन्य साइंटिफिक स्टडी से पता चला है कि 2019 से 2023 के बीच प्राइवेट एविएशन से होने वाले प्रदूषण में 46 प्रतिशत की भारी बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है. वहीं, एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, एक प्राइवेट जेट यात्री का कार्बन का एमिशन कमर्शियल उड़ान के यात्री की अपेक्षा में 10 से 14 गुना या उससे अधिक और ट्रेन से यात्रा करने वाले व्यक्ति की तुलना में लगभग 50 गुना तक अधिक हो सकता है.
  • ऊंचाई पर उड़ने का असर: प्राइवेट जेट अक्सर अधिक ऊंचाई पर उड़ान भरते हैं. ऐसे में इतनी ऊंचाई पर विमान से निकलने वाला उत्सर्जन सिर्फ ईंधन जलने से पैदा होने वाली कार्बन डाइऑक्साइड तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसके अतिरिक्त वार्मिंग या तापमान बढ़ाने वाले प्रभाव भी होते हैं.

विलासिता की कीमत और बड़े आयोजन 

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि प्राइवेट जेट का उपयोग केवल बिजनस रिलेटेड बैठकों के लिए नहीं होता है. असल में प्राइवेट जेट उड़ानों का आधा हिस्सा मनोरंजन, छुट्टियों और पर्सनल भोग-विलास से जुड़ा होता है. इसके अलावा, दुनिया भर में होने वाले बड़े और VVIP आयोजनों के दौरान दुनिया भर के करोड़पति और अरबपति इन विमानों से पहुंचते हैं, जिससे भारी मात्रा में प्रदूषण फैलता है.

क्या है इसका समाधान?

ऐसे में एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए सिर्फ क्लीन फ्यूल अपनाने से काम नहीं चलेगा. इसके लिए संस्थाओं और सरकारों को कड़े कदम उठाने होंगे. इसके अलावा, प्राइवेट जेट के उपयोग को हतोत्साहित करने के साथ ही हाई-स्पीड रेल नेटवर्क में बड़े पैमाने पर निवेश करने, छोटी दूरी की उड़ानों पर रोक लगाना और प्रैक्टिकल ऑप्शन की तलाश करना शामिल है.
दरअसल, जलवायु संकट के इस दौर में, दुनिया भर के अमीर समुदाय के इन महंगे और प्रदूषण फैलाने वाले शौक पर लगाम लगाना अब पर्यावरणविदों और पॉलिसी मेकर्स के लिए एक बड़ी प्राथमिकता बनता जा रहा है.
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