New Delhi: अमेरिका ने UK को धमकी दी है. मामला NATO के रक्षा बजट बढ़ाने के टार्गेट से जुड़ा है. अमेरिका ने कहा है कि अगर ब्रिटेन रक्षा बजट बढ़ाने में अमेरिका और NATO की उम्मीदों के मुताबिक कदम नहीं उठाता, तो वॉशिंगटन फॉकलैंड्स की संप्रभुता को लेकर अपने मौजूदा रुख पर दोबारा विचार कर सकता है. यानी जिस मुद्दे पर ब्रिटेन और अर्जेंटीना 1982 में युद्ध तक लड़ चुके हैं, वही अब NATO के रक्षा खर्च को लेकर अमेरिका के दबाव का संभावित हथियार बनता दिखाई दे रहा है.
GDP का बड़ा हिस्सा खर्च करने की उम्मीद
रक्षा बजट बढ़ाने के तहत सदस्य देशों से रक्षा और सुरक्षा पर अपने GDP का बड़ा हिस्सा खर्च करने की उम्मीद की जा रही है. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, USA अब यह देख रहा है कि उसके सहयोगी देश इस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए कितनी गंभीर और भरोसेमंद योजना बना रहे हैं. अमेरिका की नजर ब्रिटेन पर खास तौर पर है. एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि ब्रिटेन में रक्षा के क्षेत्र में बहुत क्षमता है, इसलिए समीक्षा के दौरान उसे विशेष ध्यान मिल सकता है.
रक्षा निवेश बढ़ाने की दिशा में कदम उठाया
अमेरिकी पक्ष का मानना है कि ब्रिटेन ने रक्षा निवेश बढ़ाने की दिशा में कदम तो उठाया है, लेकिन मौजूदा प्रयास उसकी नजर में पर्याप्त नहीं हैं. अधिकारी ने साफ संकेत दिया कि अमेरिका ब्रिटेन से बड़े और बुनियादी स्तर पर ज्यादा योगदान चाहता है. फॉकलैंड आइलैंड्स दक्षिण अटलांटिक महासागर में दक्षिण अमेरिका के तट से करीब 650 किमी दूर स्थित द्वीपसमूह है. इसमें दो बड़े द्वीप, ईस्ट फॉकलैंड और वेस्ट फॉकलैंड, के अलावा सैकड़ों छोटे द्वीप हैं. राजधानी स्टेनली है.
स्थानीय स्तर पर काफी हद तक स्वशासन
आज यह ब्रिटिश ओवरसीज टेरेटरी है, लेकिन वहां स्थानीय स्तर पर काफी हद तक स्वशासन है. इसके रक्षा और विदेश मामलों की जिम्मेदारी ब्रिटेन संभालता है. द्वीपों की अर्थव्यवस्था में मछली पकड़ना, खेती और पर्यटन अहम हैं. लेकिन अर्जेंटीना इन द्वीपों पर अपना दावा करता है. यही वजह है कि फॉकलैंड्स का नाम आते ही ब्रिटेन और अर्जेंटीना के बीच पुराना विवाद फिर सामने आ जाता है. दोनों इसे लेकर 1982 में लड़ चुके हैं.
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