Gadi Eisenkot israel next pm: 19 साल बाद इजरायल में नई सरकार बनने वाली है. दरअसल, राष्ट्रपति ने घोषणा कि है कि वह पिछले हफ्ते हुए चुनाव के नतीजों के बाद अगली सरकार बनाने के जिम्मा गादी आइजेनकोट को सौंपेंगे, जिसे प्रतिद्वंद्वी देश की सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले पीएम को हटाने की दिशा में पहला कदम मान रहे हैं. साथ आइजेनकोट के नेतृत्व वाला गुट (पूर्व सैन्य प्रमुख) धर्मनिरपेक्ष और उदारवादी इजराइलियों के साथ अति रूढ़िवादी यहूदियों के साथ असंभव माने जाने वाले गठबंधन की संभावना खोल दिया है. उन्हें सरकार बनाने के लिए जरूरी संख्याबल मिल सकता है.
वहीं, राष्ट्रपति हरजोग ने कहा कि मैंने सप्ताहभर सभी दलों से परामर्श करने के बाद सरकार बनाने का पहला मौका आइसेनकोट को देना चाहता हूं. इस चुनाव में किसी पक्ष को बहुमत नहीं मिला क्योंकि तीन साल से युद्ध में बुरी तरह प्रभावित है.
नेतन्याहू ने की ये अपील
इस पूरे मामले पर नेतन्याहू ने राष्ट्रीय एकता सरकार के गठन का आह्वान किया है, जिसमें उन सभी पार्टियों से एकजुट होने की अपील की गई, जो यहूदियों के इस एक मात्र देश की रक्षा करना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एकता सरकार ईरान से परमाणु खतरे को हमेशा के लिए खत्म कर देगी. इजरायल को एक यहूदी देश के रूप में हमेशा सुरक्षित रखेगी.
पार्टियों में कितना समर्थन मिला
अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति के साथ राजनीतिक दलों के प्रमुखों की बातचीत गुरुवार को पूरी हुई. इस दौरान 120 सदस्यीय नेसेट (इजरायली संसद) के 67 सदस्यों ने आइजेनकोट के समर्थन में अपनी राय दी, जबकि नेतन्याहू को 46 सांसदों का समर्थन मिला. नेतन्याहू के नेतृत्व वाले दक्षिणपंथी और धार्मिक गठबंधन के पास 53 सीटें हैं. हालांकि उनके पुराने सहयोगी यूनाइटेड टोरा यहूदी पार्टी ने समर्थन देने से परहेज किया है यह पार्टी अति-रूढ़िवादी यहूदियों को अनिवार्य सैन्य सेवा से छूट देने के मुद्दे पर सरकार से नाराज है. ऐसे में हर्जोग ने अभी तक किसी भी पक्ष के समर्थन में स्पष्ट संकेत नहीं दिया है.
उनका कहना है कि आंकड़े भले ही एक तरफ झुकते दिखाई दे रहे हों, लेकिन दोनों खेमों के भीतर और उनके बीच मौजूद असहमतियों के कारण यह तय करना मुश्किल है कि कौन स्थिर गठबंधन बना पाएगा. इजरायल में सरकार बनाने के लिए 61 सीटों का बहुमत जरूरी है. मौजूदा चुनावी स्थिति में नेतन्याहू के दक्षिणपंथी और धार्मिक गठबंधन के पास 53 सीटें हैं, जबकि आइजेनकोट का समर्थन करने वाले चार यहूदी दलों के पास 48 सीटें हैं. अरब नेतृत्व वाली पार्टियों के पास कुल 19 सीटें हैं.
आइजेनकोट को इन अरब दलों का समर्थन मिला है, जिससे उनके पक्ष में 67 सांसदों का आंकड़ा पहुंचता है, लेकिन उन्होंने इन पार्टियों को सरकार में शामिल करने से इनकार किया है. इन दलों में ज्वाइंट लिस्ट के 11 और यूनाइटेड अरब लिस्ट (राम) के आठ सांसद हैं. राम पार्टी के नेता मंसूर अब्बास ने आइजेनकोट के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल होने की इच्छा जताई है। वहीं, ज्वाइंट लिस्ट ने सरकार में शामिल होने से इनकार करते हुए बाहर से समर्थन देने की पेशकश की.
आइजेनकोट के सामने भी शर्तें
आइजेनकोट ने इन दलों के समर्थन के बावजूद उनके साथ सरकार बनाने के लिए कुछ शर्तें रखी हैं. इनमें हमास को आतंकवादी संगठन के रूप में मान्यता देना भी शामिल है. अब्बास ने हमास को निरस्त्र करने का समर्थन किया है, लेकिन उसे आतंकवादी संगठन कहने से परहेज किया है.
इजरायली कानून के तहत किसी उम्मीदवार के लिए 61 सांसदों का प्रत्यक्ष समर्थन होना जरूरी नहीं है. वह इससे कम समर्थन के साथ भी सरकार बना सकता है, बशर्ते संसद में विश्वास मत हासिल कर ले. इस आधार पर आइजेनकोट अल्पमत सरकार बनाने की कोशिश कर सकते हैं और बाद में अति-रूढ़िवादी दलों को अपने साथ जोड़ सकते हैं.