Google: आयरलैंड के डेटा संरक्षण आयोग (DPC) ने Google पर 403 मिलियन यूरो (करीब 4,000 करोड़ रुपए) का जुर्माना लगाया है, इसके साथ ही कंपनी को छह महीने के भीतर अपनी लोकेशन डेटा प्रोसेसिंग प्रणाली को नियमों के अनुरूप बनाने का निर्देश दिया. बता दें कि यह मामला Google की ‘लोकेशन हिस्ट्री’ सेवा और संबंधित लोकेशन डेटा प्रोसेसिंग गतिविधियों से जुड़ा है. यह सेवा उपयोगकर्ताओं के मोबाइल उपकरणों के जरिए उनकी लोकेशन का रिकॉर्ड रखती है.
दरअसल, लोकेशन हिस्ट्री फीचर सिर्फ उन उपयोगकर्ताओं के लिए सक्रिय होता है जो इसके लिए स्वेच्छा से सहमति (ऑप्ट-इन) देते हैं. इसके बाद Google उपयोगकर्ताओं के डेटा का विश्लेषण कर उनके द्वारा देखे गए स्थानों, गतिविधियों और विभिन्न स्थानों के बीच की यात्रा जैसी जानकारी का अनुमान लगाता है.
गूगल ने कई प्रावधानों का किया उल्लंघन
इसी बीच यूरोपीय संघ के डेटा गोपनीयता नियामक के फैसले में कहा गया कि Google ने जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन (जीडीपीआर) के तहत वैधता, निष्पक्षता और पारदर्शिता से जुड़े कई प्रावधानों का उल्लंघन किया है. नियामक के अनुसार, गूगल वेब एंड ऐप एक्टिविटी, लोकेशन हिस्ट्री और लोकेशन एक्यूरेसी से जुड़े डेटा प्रोसेसिंग के मामलों में यह साबित करने में विफल रहा कि वह उपयोगकर्ताओं के व्यक्तिगत डेटा का उपयोग जीडीपीआर के मूल सिद्धांतों के अनुरूप कर रहा है.
डेटा संरक्षण नियमों का उल्लंघन
इतना ही नहीं, आयोग ने यह भी पाया कि Google ने उपयोगकर्ताओं का लोकेशन डेटा आवश्यक समय से अधिक समय तक सुरक्षित रखा, जो डेटा संरक्षण नियमों का उल्लंघन है. ऐसे में डीपीसी के उप आयुक्त ग्राहम डॉयल ने कहा कि लोकेशन डेटा व्यक्तिगत जानकारी का बेहद संवेदनशील प्रकार है, जिससे ऑनलाइन सेवाओं की उपयोगिता बढ़ सकती है, लेकिन यह किसी व्यक्ति के बारे में कई निजी जानकारियां भी उजागर कर सकता है. उन्होंने कहा कि यदि उपयोगकर्ताओं को पूरी जानकारी नहीं दी जाती, तो वे यह समझ ही नहीं पाते कि उनकी लोकेशन का उपयोग विज्ञापन लक्षित करने या उनकी रुचियों का अनुमान लगाने के लिए किया जा रहा है. इससे वे अपने व्यक्तिगत डेटा पर नियंत्रण खो सकते हैं.
डॉयल के अनुसार, उपयोगकर्ताओं के लोकेशन डेटा को जरूरत से अधिक समय तक सुरक्षित रखने से यह स्थिति और गंभीर हो गई. जीडीपीआर के तहत यूरोपीय आर्थिक क्षेत्र (EEA) में व्यक्तिगत डेटा को उच्च स्तर का संरक्षण प्रदान किया जाता है और यह अनिवार्य है कि डेटा का उपयोग कानूनी, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से किया जाए. डेटा संरक्षण आयोग ने कहा है कि वह इस मामले से संबंधित विस्तृत निर्णय बाद में सार्वजनिक करेगा.
यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब दुनिया भर के नियामक प्राधिकरण बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों की डेटा संग्रह, उपयोग और गोपनीयता नीतियों की अधिक कड़ाई से जांच कर रहे हैं. गूगल के लिए यह फैसला डेटा संरक्षण और यूजर गोपनीयता से जुड़े मामलों में एक बड़ा झटका माना जा रहा है.