Hottest May: इस समय धरती का तापमान तेजी से खतरनाक स्तर की ओर बढ़ रहा है, जिसका सबूत अब वैज्ञानिकों ने भी दे दिया है. दरअसल, यूरोपीय संघ की कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस (C3S) के मुताबिक, इस साल का मई महीना अबतक के रिकॉर्ड का दूसरा सबसे गर्म मई रहा.
C3S ने कहा कि जलवायु परिवर्तन यानी क्लाइमेट चेंज और विकसित हो रहे अल नीनो मौसम पैटर्न ने मिलकर जमीन और समुद्र के औसत तापमान को बढ़ा दिया. यही वजह है कि धरती लगातार गर्म होती जा रही है.
अबतक के इतिहास में सबसे गर्म मई का महीना
बता दें कि साल 1940 से धरती के तापमान का रिकॉर्ड रखा जा रहा है. ऐसे में अबतक के इतिहास में सबसे गर्म मई का महीना 2024 में था. जबकि दूसरा सबसे गर्म मई के महीने का टैग साल 2026 को मिला. इस रिपोर्ट के अनुसार, पिछले महीने (मई 2026) दुनिया का औसत तापमान 19वीं सदी के औद्योगीकरण से पहले के समय के औसत तापमान से 1.42 डिग्री सेल्सियस ज्यादा था.
पश्चिमी यूरोप में साल की शुरुआत में दर्ज की गई ये सबसे गंभीर हीटवेव में से एक देखी गई है. ऐसे में C3S का कहना है कि यूरोप में पड़ी यह गर्मी वैज्ञानिकों की उम्मीदों के मुताबिक ही थी. क्योकि उन्होंने पहले से अनुमान लगा लिया था कि जलवायु परिवर्तन दुनिया के सबसे तेजी से गर्म हो रहे महाद्वीप को प्रभावित करेगा.
प्रशांत महासागर के कुछ हिस्सों में भी असाधारण तापमान
बता दें कि अल नीनो प्राकृतिक रूप से हर 2 से 7 साल में होता है. जब व्यापारिक हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं, तो पूर्वी प्रशांत महासागर का पानी ज्यादा गर्म हो जाता है और इसका असर आमतौर पर दुनिया के तापमान बढ़ने और बारिश के पैटर्न के बिगड़ने के रूप में दिखता है. अर्थात कुछ इलाकों में सूखा पड़ सकता है, जबकि कुछ जगहों पर बहुत ज्यादा बारिश हो सकती है.