Houthi red sea attacks: अमेरिका और ईरान के बीच फिर छिड़ी जंग एक बार फिर तेल संकट का संकेत दे रहा है. इस बीच यमन में ईरान के समर्थन वाले हथियारबंद गुट, हूती ने सोमवार को कहा कि वे लाल सागर में नाकेबंदी करेंगे और सऊदी अरब के जहाजों की आवाजाही रोक देंगे. हूतियों की इस धमकी से मिडिल ईस्ट के संघर्ष में एक नया मोर्चा खुलने का खतरा पैदा हो गया है और अस्थिर ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर दबाव बढ़ गया है.
यह घोषणा ऐसे समय में की गई जब पूरी दुनिया तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है. इस दौरान लोगों के जहन में एक ही सवाल है कि क्या अमेरिकी और ईरानी सेनाओं के बीच बमबारी का दौर और बढ़ेगा. हालांकि सोमवार और मंगलवार की दरम्यानी रात भी अमेरिका और ईरान ने एक-दूसरे पर नए हमले किए. एक तरफ ईरान ने उन देशों को निशाना बनाया जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने हैं, और इसके जवाब में अमेरिका ने लगातार 10वीं रात ईरान पर हमले किए.
क्या है हूतियों का प्लान?
दरअसल, होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान और अमेरिका की नाकेबंदी के कारण ग्लोबल फ्यूल सप्लाई कम हो गई है और कीमतें बढ़ गई हैं. ऐसे में अमेरिका का सहयोगी सऊदी अरब अपने कुछ एक्सपोर्ट को लाल सागर के रास्ते भेजने में कामयाब रहा है. लेकिन अब हूतियों का कहना है कि वे सऊदी जहाजों को बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से नहीं गुजरने देंगे. यह लाल सागर का दक्षिणी एंट्री प्वाइंट है. अगर हूतियों ने ऐसा किया तो इससे दुनिया में तेल संकट और गहरा हो सकता है.
रिपोर्ट के अनुसार, हूती सेना के प्रवक्ता याह्या सरी ने भाषण में कहा कि यह कदम यमन पर सऊदी अरब की लगातार घेराबंदी के जवाब में उठाया गया है. वहीं जानकारों का कहना है कि यह बात शायद घरेलू जनता को ध्यान में रखकर कही गई है, और हूती की यह रणनीति ईरान के हितों से गहराई से जुड़ी हुई हैं.
क्या है तनाव की वजह
बता दें कि हालिया तनाव की शुरुआत होर्मुज जलडमरूमध्य पर कंट्रोल किसका होगा, इससे जुड़ी थी. लेकिन अब यह हमलों और जवाबी हमलों के एक ऐसे चक्र में बदल गया है जिसमें शुक्रवार से कम से कम तीन अमेरिकी सैनिक मारे जा चुके हैं, फारस की खाड़ी के अरब देशों पर हमले हुए हैं और ईरान तथा अमेरिका के सहयोगी देश कुवैत में अहम बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है. सोमवार को अमेरिकी सेना ने कबूल किया कि पिछले दो हफ्तों में युद्ध में घायल हुए अमेरिकी सैनिकों की संख्या बढ़कर लगभग 100 हो गई है.

