बलूचिस्तान में बढ़ रहे मानवाधिकार उल्लंघन के मामले, एक महिने में 29 गैर-न्यायिक हत्याएं और 56 लोग लापता 

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Human rights violation case: पाकिस्तान के बलूचिस्तान में बढ़ते मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर एक प्रमुख मानवाधिकार संगठन ने चिंता जताते हुए कहा है कि वहां पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की ओर से जबरन लोगों को गायब करना, यातनाएं देना और गैर-न्यायिक हत्या करना लगातार जारी है.

दरअसल, बलूच नेशनल मूवमेंट के मानवाधिकार विभाग ‘पांक’ ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि इस साल मार्च महीने में पूरे बलूचिस्तान में 29 लोगों की गैर न्यायिक हत्‍या के मामले सामने आए.  इसके अलावा, 56 लोगों के जबरन लापता किए जाने के मामले भी दर्ज किए गए, जो ‘बेकाबू सरकारी ताकत के खतरनाक परिणामों’ को दिखाती हैं. इन घटनाओ से साफ होता है कि आम नागरिकों को व्यवस्थित तरीके से निशाना बनाया जा रहा है.

बलूचिस्तान में डर और जवाबदेही की कमी वाला माहौल

मानवाधिकार विभाग ने कहा क‍ि मार्च 2026 में सामने आए मामलों से यह साफ दिखता है कि राज्य की ओर से दमन, मनमानी गिरफ्तारियां, शारीरिक और मानसिक यातनाएं और गैरकानूनी हत्याएं लगातार हो रही हैं. पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा किए जा रहे ये अत्याचार बलूचिस्तान में डर और जवाबदेही की कमी वाला माहौल बना रहे हैं. संगठन ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं, संयुक्त राष्ट्र और सिविल सोसायटी से अपील की कि वे बलूचिस्तान में बिगड़ते हालात पर तुरंत ध्यान दें और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करें, साथ ही न्याय और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दबाव बनाएं.

इसी बीच, मानवाधिकार संगठन बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) ने शिक्षाविद गमखार हयात की हत्या की कड़ी निंदा की, उन्होंने इसे ‘ज्ञान, लेखनी और जागरूकता’ को दबाने की कोशिश बताया. बता दें कि मशहूर कवि, साहित्यकार और शिक्षक गमखार हयात की 16 मई को बलूचिस्तान के नुशकी जिले के किल्ली मेंगल इलाके में कथित तौर पर पाकिस्तान समर्थित डेथ स्क्वॉड से जुड़े लोगों ने गोली मारकर हत्या कर दी.

सिर्फ एक व्यक्ति की हत्या नहीं, बल्कि बलूच समाज की बौद्धिक सोच, मातृभाषा के प्रचार पर हमला

बीवाईसी ने कहा, प्रोफेसर गमखार हयात बलूच जैसे प्रसिद्ध लेखक, बुद्धिजीवी और शिक्षक की बेरहमी से हत्या, बलूचिस्तान में चल रहे उस पाकिस्तानी दमन का हिस्सा है जिसमें ज्ञान, लेखनी और चेतना को सरकारी ताकत के जरिए दबाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक व्यक्ति की हत्या नहीं, बल्कि बलूच समाज की बौद्धिक सोच, मातृभाषा के प्रचार और सामूहिक चेतना पर हमला है. बीवाईसी के मुताबिक, कई दशकों से बलूचिस्तान में आम नागरिकों के खिलाफ लगातार ‘नरसंहार’ जैसी स्थिति बनी हुई है, जहां शिक्षकों, बुद्धिजीवियों, पत्रकारों, छात्रों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को एक सुनियोजित नीति के तहत निशाना बनाया जा रहा है.

Latest News

ईरानः प्रदर्शन के दौरान जलती दुकान की कर रही थी रिकॉर्डिंग, कोर्ट ने महिला को सुनाई मौत की सजा

Death sentence for Laila Abolhasani: इस्लामिक अदालत ने ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान एक सुपरमार्केट में लगी आग...

More Articles Like This

Exit mobile version