Islamabad: पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) द्वारा 27 सितंबर को इस्लामाबाद लॉन्ग मार्च के ऐलान के बाद शहबाज शरीफ सरकार ने सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया है. पंजाब प्रांत में धारा 144 लागू कर दी है, जिससे देश में एक बार फिर बड़े राजनीतिक टकराव की आशंका बढ़ गई है. जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई और संविधान की संप्रभुता की मांग को लेकर पीटीआई ने इस राष्ट्रव्यापी बड़े आंदोलन की तैयारी की है.
पूरे प्रांत में धारा 144 लागू
पंजाब सरकार ने सुरक्षा खतरों और आतंकी इनपुट का हवाला देते हुए पूरे प्रांत में धारा 144 लागू कर दी है. इसके तहत रैलियों, धरनों और 5 या अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है. सरकार ने इस्लामाबाद की सुरक्षा के लिए 23,500 अतिरिक्त पुलिसकर्मियों और अर्धसैनिक बलों की मांग की है. प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए संवेदनशील इलाकों और ‘रेड जोन’ को करीब 1,000 भारी कंटेनर लगाकर सील किया जा रहा है.
सभी मुख्यमंत्रियों को निर्देश
कानून-व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर पुलिस ने पंजाब और रावलपिंडी समेत कई इलाकों में पीटीआई कार्यकर्ताओं और नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें हिरासत में लेना शुरू कर दिया है. इस्लामाबाद हाईकोर्ट (IHC) ने भी इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए सभी मुख्यमंत्रियों को निर्देश दिया है कि इस मार्च या विरोध प्रदर्शन में किसी भी तरह के सरकारी संसाधनों, वाहनों या मशीनरी का उपयोग न किया जाए.
मार्च को सफल बनाने के लिए करोड़ों का बजट तय
पीटीआई ने इस मार्च को सफल बनाने के लिए करोड़ों रुपये का बजट तय किया है और देश के प्रमुख शहरों जैसे लाहौर, कराची, क्वेटा को पूरी तरह बंद करने की रणनीति बनाई है. सरकार की इस भारी नाकेबंदी और पीटीआई के आक्रामक रुख के कारण पाकिस्तान में एक बार फिर हिंसक राजनीतिक टकराव की आशंका काफी बढ़ गई है.
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