भारत और इटली के बीच संबंधो का नया अध्याय, अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

India Italy relations: भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (आईएन-स्पेस) ने बताया कि उसने भारतीय स्पेस-टेक कंपनियों के एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए इटली के वेनिस में आयोजित ‘स्पेस मीटिंग्स वेनेटो 2026’ में हिस्सा लिया, जो अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को मजबूत करने और भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र की वैश्विक मौजूदगी बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.

इस कार्यक्रम में उद्योग जगत के दिग्गज, स्टार्टअप, नीति निर्माता और तकनीकी कंपनियां शामिल हुईं, जिसमें भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने इटैलियन स्पेस इंडस्ट्री स्टडी ग्रुप के साथ रणनीतिक बातचीत की, ताकि दोनों देशों के बीच व्यावसायिक और तकनीकी सहयोग को और मजबूत किया जा सके.

एस्ट्रोबेस स्पेस टेक्नोलॉजीज ने इम्पल्सो के साथ किया एमओयू

कर्नाटक स्थित एस्ट्रोबेस स्पेस टेक्नोलॉजीज ने इम्पल्सो स्पेस के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए, जिसका उद्देश्य ग्राहकों की पहुंच बढ़ाना और इंटीग्रेटेड मिशन मैनेजमेंट तथा लॉन्च सर्विस नेटवर्क के जरिए लॉन्च अवसरों की तलाश करना है.

एक अन्य भारतीय कंपनी केपलर एयरोस्पेस ने अपोजियो स्पेस के साथ एक फ्रेमवर्क समझौता किया. इसके तहत ‘ग्राउंड स्टेशन ऐज ए सर्विस’ (जीएसएएएस) इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार किया जाएगा और भारत तथा यूरोप के बीच सैटेलाइट सहयोग को मजबूत किया जाएगा.यह साझेदारी क्यूबसैट सिस्टम, पेलोड टेक्नोलॉजी, सैटेलाइट इंफ्रास्ट्रक्चर और मिशन संचालन जैसे क्षेत्रों में संयुक्त अवसरों की तलाश करेगी.

इंफ्रास्ट्रक्चर तकनीकों के विकास के लिए रणनीतिक साझेदारी की घोषणा

भारतीय प्रतिनिधिमंडल में कुल नौ स्पेस-टेक कंपनियां शामिल हुईं, जिन्होंने कई सहयोगी पहलों की घोषणा की. बयान में कहा गया है कि एक अन्य कंपनी व्योमआईसी ने इस आयोजन के दौरान अपनी कई तकनीकों का प्रदर्शन किया और अगली पीढ़ी की नेविगेशन तथा मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर तकनीकों के विकास के लिए रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की.

आईएन-स्पेस के प्रोग्राम मैनेजमेंट एंड ऑथराइजेशन डायरेक्टरेट के निदेशक डॉ. पी. के. जैन ने कहा कि ‘स्पेस मीटिंग्स वेनेटो’ में भारत की भागीदारी देश की अंतरिक्ष क्षमताओं और निजी क्षेत्र पर बढ़ते वैश्विक भरोसे को दर्शाती है. उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम के जरिए भारतीय और अंतरराष्ट्रीय स्पेस कंपनियों के बीच कई महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारियां बनी हैं.

वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत मजबूत कर रहा अपनी स्थिति

उन्होंने कहा, “एस्ट्रोबेस स्पेस टेक्नोलॉजीज, केपलर एयरोस्पेस और व्योमआईसी द्वारा किए गए समझौते भारतीय अंतरिक्ष कंपनियों की बढ़ती प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और वैश्विक तैयारी को दिखाते हैं. भारत वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है और आईएन-स्पेस उद्योग आधारित अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है.”

यह यात्रा 2025 में इटैलियन एयरोस्पेस प्रतिनिधिमंडल की भारत यात्रा के बाद हुई है और इसे भारत तथा इटली के बीच व्यावसायिक अंतरिक्ष सहयोग को गहरा करने की व्यापक कोशिशों का हिस्सा माना जा रहा है. यह पहल जी20 समिट 2024 के दौरान घोषित भारत-इटली संयुक्त रणनीतिक कार्ययोजना 2025-2029 के अनुरूप भी है.

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