इंडो-नेपाल सीमा पर परिचालन बंद होने से बवाल, सड़क पर उतरे प्रदर्शनकारी, बांस लगाकर बॉर्डर मार्ग को घेरा

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Indo Nepal Border: बिहार के मोतिहारी जिले के घोड़ासहन स्थित बैद्यनाथपुरदृ खाप इंडो-नेपाल बॉर्डर पर प्रदर्शन चल रहा है. चार चक्का वाहनों का आवागमन शुरू कराने की मांग को लेकर सैकड़ों लोग मंगलवार सुबह ही पहुंच गए थे. वहीं इस आंदोलन को नेपाल के कई राजनीतिक दलों के नेताओं का समर्थन भी मिल रहा है. सीमा नाका संघर्ष समिति के बैनर तले आमरण अनशन भी शुरू किया गया है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी तब तक आंदोलन जारी रहेगा.

समियाना लगाकर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा

प्रदर्शनकारियों ने बॉर्डर पर टेंट और समियाना लगाकर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. भारत से नेपाल को जोड़ने वाली सड़क को पूरी तरह जाम कर दिया है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कोरोना महामारी से पहले इस बॉर्डर से चार पहिया वाहनों का नियमित परिचालन होता था लेकिन लॉकडाउन के दौरान इसे बंद कर दिया गया. अन्य कई इंडो-नेपाल बॉर्डरों से वाहन परिचालन शुरू हो चुका है लेकिन बैद्यनाथपुर-खाप बॉर्डर अब भी बंद है, जिससे सीमावर्ती इलाकों के लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है.

महज 5 KM की दूरी तय करने के लिए 25 KM का अतिरिक्त फेरा

स्थानीय लोगों के मुताबिक रिश्तेदारी, शादी-विवाह या किसी आपात स्थिति में नेपाल जाने के लिए उन्हें 25 किलोमीटर दूर गौर बॉर्डर या 50 किलोमीटर दूर बीरगंज बॉर्डर से होकर जाना पड़ता है. महज 5 किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए 25 किलोमीटर का अतिरिक्त फेरा लगाना पड़ रहा है. नेपाल के रौतहट जिले के रामपुर खाप निवासी और पूर्व शिक्षक मोहम्मद तजमुल हक अपनी मांगों को लेकर सीमा नाका संघर्ष समिति के बैनर तले आमरण अनशन पर बैठ गए हैं. पूर्व उपप्रधान जगतलाल यादव ने कहा कि भारत और नेपाल के बीच वर्षों पुराना बेटी-रोटी का रिश्ता है लेकिन बॉर्डर बंद रहने से सामाजिक और पारिवारिक रिश्तों पर असर पड़ रहा है.

पिछले एक साल से अधिक समय से की जा रही है मांग

संघर्ष समिति के कोषाध्यक्ष साहेब शाह ने बताया कि छोटी भंसार (लोकल कस्टम) शुरू करने और वाहन परिचालन बहाल करने की मांग पिछले एक साल से अधिक समय से की जा रही है लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है. प्रदर्शन के दौरान परोहा नगरपालिका क्षेत्र के लोगों ने बांस लगाकर बॉर्डर मार्ग को घेर दिया. इस आंदोलन को नेपाल के रौतहट सांसद किरण शाह समेत कई राजनीतिक दलों के नेताओं का समर्थन भी मिल रहा है. बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल हैं. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, आंदोलन जारी रहेगा.

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