फैसला स्वीकार नहीं…भारत ने सिंधु जल संधि पर ‘कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन’ के फैसले को किया खारिज

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Indus Waters Treaty: भारत ने एक बार फिर सिंधु जल संधि (IWT) को लेकर तथाकथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (COA) के फैसले को पूरी तरह खारिज कर दिया है. विदेश मंत्रालय (MEA) ने साफ साफ कहा कि वो इस निकाय की वैधता को नहीं मानता है, इसलिए फैसले को स्वीकार नहीं करता है.

विदेश मंत्रालय ने इस मुद्दे पर बयान जारी कर साफ शब्दों में कहा कि गैर-कानूनी तरीके से बनाई गई तथाकथित ‘कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन’ ने ‘सिंधु जल संधि’ के तहत अंतरिम उपायों और संधि की स्थिति के बारे में अपना फैसला (जिसे उसने ‘अवार्ड’ कहा है) सुनाया है.

भारत में खारिज किए सभी फैसले

उन्होंने कहा कि यह तथाकथित कोर्ट विश्व बैंक के संधि की शर्तों का साफ तौर पर उल्लंघन करते हुए बनाया गया था. भारत इसके तथाकथित फैसले को पूरी तरह से खारिज करता है, ठीक वैसे ही जैसे उसने इस गैर-कानूनी संस्था के पहले के सभी फैसलों को सख्ती से खारिज किया है. MEA ने आगे कहा कि भारत ने कभी भी गैर-कानूनी तरीके से बनाई गई इस तथाकथित ‘कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन’ के कानूनी अस्तित्व को मान्यता नहीं दी है. भारत का हमेशा से यह मानना रहा है कि इस तथाकथित आर्बिट्रल संस्था का गठन ही ‘सिंधु जल संधि’ का गंभीर उल्लंघन है. इसलिए, भारत कभी भी इस संस्था के सामने पेश नहीं हुआ और न ही उसने इसके पहले के फैसलों को तवज्जो दी.

कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन को फैसले लेने का कोई अधिकार नहीं 

भारत का कहना है कि इस तथाकथित ‘कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन’ को देश के संप्रभु फैसलों पर कोई भी निर्णय लेने का अधिकार नहीं है. इसके फैसलों का, चाहे अभी हों या भविष्य में, भारत द्वारा चलाई जा रही परियोजनाओं से जुड़े भारत के कामों पर कोई असर नहीं पड़ेगा. इसके साथ ही ‘सिंधु जल संधि’ को स्थगित रखने का भारत का निर्णय लागू रहेगा.

बता दें कि पहलगाम की बैसरन घाटी में अप्रैल 2025 में हुए आतंकी हमले के बाद से ही भारत ने संधि को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया है. जिसके बाद से पाकिस्तान की विचारधारा के खिलाफ देश अपने रुख पे कायम है, और वो स्पष्ट कर चुका है कि ‘खून और पानी साथ नहीं बह सकते.’

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