एक हाथ में बम, दूसरे में बातचीत…, ईरान काे हर माेर्चे पर झुकाना चाहता है अमेरिका

Aarti Kushwaha
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Iran Israel War: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अब अमेरिका की दोहरी नीति किसी से छिपी नहीं है, बाहर से सैन्य कार्रवाई और भीतर से बातचीत. व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट के ताजा बयान ने साफ कर दिया है कि अमेरिका अब ईरान के खिलाफ ‘हाफ-मेज़र’ नहीं, बल्कि पूरी तरह दबाव वाली रणनीति पर आगे बढ़ रहा है.

दरअसल, अमेरिका एक तरफ ईरान पर सैन्य हमले तेज कर रहा है, तो दूसरी तरफ बंद दरवाजों के पीछे बातचीत का रास्ता भी खुला रखे हुए है. यह रणनीति महज संयोग नहीं, बल्कि एक सोची-समझी भू-राजनीतिक चाल है. इसका मकसद है, ईरान को हर मोर्चे पर दबाव में लाकर अपनी शर्तों पर झुकाना.

व्हाइट हाउस का साफ संदेश

प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट के बयान से यह संकेत मिला है कि अमेरिका अब ईरान को लेकर किसी तरह की नरमी के मूड में नहीं है. बातचीत केवल एक विकल्प है, लेकिन प्राथमिकता दबाव बनाकर रणनीतिक बढ़त हासिल करना है. यानी ‘टॉक भी, स्ट्राइक भी’ दोनों एक साथ.

अमेरिका के इस डबल गेम का असर पूरे मिडिल ईस्ट में दिख रहा है. एक तरफ जंग का खतरा गहराता जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ कूटनीतिक हल की उम्मीद भी जिंदा रखी जा रही है. लेकिन सवाल यही है कि क्या यह रणनीति हालात को संभालेगी या और ज्यादा भड़का देगी?

क्या है अमेरिका की असली रणनीति?

विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका ‘मैक्सिमम प्रेशर’ की नीति पर काम कर रहा है, जहां सैन्य, आर्थिक और कूटनीतिक तीनों स्तरों पर ईरान को घेरा जा रहा है. बातचीत सिर्फ एक टूल है, असली मकसद है ईरान की नीतियों में बदलाव लाना. आने वाले दिनों में यह तय हो जाएगा कि मिडिल ईस्ट में शांति की राह खुलेगी या टकराव और गहरा होगा.

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