Tehran: ईरान ने इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद के लिए कथित तौर पर काम करने वाले एक और युवक एहसान अफरेशतेह को फांसी दे दी है. ईरानी न्यायपालिका की वेबसाइट के अनुसार एहसान अफरेशतेह पर इजरायल को संवेदनशील और गोपनीय जानकारी बेचने का आरोप था. बता दें कि कुछ दिन पहले भी ईरान ने एक एयरोस्पेस इंजीनियरिंग छात्र को फांसी दी थी, जिस पर अमेरिका और इजरायल के लिए जासूसी करने का आरोप था.
नेपाल में मोसाद की ओर से प्रशिक्षण
रिपोर्ट में दावा किया गया कि एहसान को नेपाल में मोसाद की ओर से प्रशिक्षण दिया गया था. ईरान के अनुसार आरोपी को जासूसी और यहूदी शासन के साथ सहयोग के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. बाद में अदालत ने उसे दोषी ठहराया और देश के सर्वोच्च न्यायालय ने भी सजा को बरकरार रखा. इसके बाद बुधवार सुबह उसे फांसी दे दी गई. यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बना हुआ है.
सुरक्षा मामलों में बढ़ी फांसी की घटनाएं
फरवरी 2026 के बाद से ईरान में जासूसी और सुरक्षा मामलों में फांसी की घटनाएं बढ़ी हैं. मानवाधिकार संगठनों के अनुसार चीन के बाद ईरान दुनिया में सबसे अधिक फांसी देने वाले देशों में शामिल है. जासूसों के खिलाफ ईरान की कार्रवाई जारी है. ईरान की जासूसी एजेंसियाँ और सुरक्षाबल पूरी तरह से एक्टिव हैं. पिछले साल जून से अब तक ईरान में सैकड़ों जासूसों को गिरफ्तार किया जा चुका है और उनमें से कई जासूसों को तो मौत की सज़ा भी दी जा चुकी है.
अमेरिका के लिए भी जासूसी
ईरान में जासूसी के आरोप में गिरफ्तार लोगों में दोहरी नागरिकता वाले लोग और विदेशी भी शामिल हैं जो सिर्फ इज़रायल के लिए नहीं, बल्कि अमेरिका के लिए भी जासूसी कर रहे थे और ईरान की खुफिया जानकारी लीक कर रहे थे. इज़रायल और अमेरिका की तरफ से ईरान के खिलाफ सिर्फ सैन्य मोर्चे पर ही नहीं, बल्कि जासूसों के ज़रिए खुफिया युद्ध भी लड़ा जा रहा है, जिससे ईरान की खुफिया जानकारी का पता लगाया जा सके और उसे ईरान के ही खिलाफ इस्तेमाल करते हुए इसे कमज़ोर किया जा सके.
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