Washington: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को खुली चेतावनी दी है. ट्रम्प ने कहा है कि यदि ईरानी सरकार ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई या अत्यधिक बल प्रयोग किया तो अमेरिका चुप नहीं बैठेगा. उन्होंने कहा कि ईरान बहुत नाज़ुक स्थिति में है. वहां के लोगों के साथ बर्बरता हुई तो उसके गंभीर परिणाम होंगे. ट्रम्प के बयान के बाद मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ गया है. हालांकि अमेरिकी प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि फिलहाल किसी सैन्य कार्रवाई की आधिकारिक योजना नहीं है लेकिन हालात पर बारीकी से नजर रखी जा रही है.
बातचीत और सुधार ही संकट का स्थायी समाधान
संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ और कई मानवाधिकार संगठनों ने ईरान से इंटरनेट बहाल करने, शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति देने और बल प्रयोग से बचने की अपील की है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय का मानना है कि बातचीत और सुधार ही संकट का स्थायी समाधान हो सकते हैं. बता दें कि ईरान इस समय गंभीर राजनीतिक और सामाजिक संकट से गुजर रहा है. देश के लगभग सभी प्रमुख शहरों में सरकार विरोधी प्रदर्शन जारी हैं.
भ्रष्टाचार के आरोपों से जनता में गुस्सा
बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, मुद्रा रियाल की गिरती कीमत और भ्रष्टाचार के आरोपों से जनता में गुस्सा लंबे समय से सुलग रहा था जो अब खुलकर सड़कों पर दिख रहा है. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए इरानी सरकार ने देशभर में इंटरनेट और मोबाइल डेटा सेवाएं लगभग पूरी तरह बंद कर दी हैं. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्सए मैसेजिंग ऐप्स और अंतरराष्ट्रीय संपर्क बाधित होने से आम नागरिकों का बाहरी दुनिया से संपर्क टूट गया है.
प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़पें
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यह कदम विरोध की आवाज़ दबाने और सुरक्षा बलों की कार्रवाई को छिपाने के लिए उठाया गया है. प्रदर्शन तेहरान, मशहद, इस्फहान, शिराज, तबरीज़ और कराज जैसे बड़े शहरों तक फैल चुके हैं. कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़पें हुई हैं. अधिकार समूहों के अनुसार दर्जनों लोग मारे गए हैं और सैकड़ों को हिरासत में लिया गया है. हालांकि सरकारी स्तर पर हताहतों के आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है.
देश में अराजकता फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई
ईरान के सर्वोच्च नेता आयातुल्लाह अली खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि देश में अराजकता फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध-प्रदर्शनों के पीछे विदेशी ताकतों विशेषकर अमेरिका और उसके सहयोगियों का हाथ है.
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