Iran Protests: ईरान में जारी भीषण हिंसक विरोध-प्रदर्शनों में करीब 2,000 लोगों की मौत हो चुकी है, इनमें आम प्रदर्शनकारी और सुरक्षा बलों के जवान दोनों शामिल हैं. ईरानी सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने खुद स्वीकार किया है. यह पहली बार है जब ईरानी अधिकारियों ने इतनी बड़ी संख्या में मौतों को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है. दूसरी ओर ईरान में जारी सरकार-विरोधी प्रदर्शनों पर संयुक्त राष्ट्र ने गहरी चिंता जताई है.
शासन के लिए सबसे बड़ा आंतरिक संकट
बता दें कि यह विरोध-प्रदर्शन ईरानी मुद्रा के बुरी तरह गिरने, महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक बदहाली के कारण भड़के हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि इसे पिछले कम से कम तीन वर्षों में शासन के लिए सबसे बड़ा आंतरिक संकट माना जा रहा है. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने सैकड़ों मौतों पर भयावह हिंसा कहा. संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है.
ईरानी नागरिकों के खिलाफ से भयभीत और स्तब्ध
उन्होंने कहा कि इन प्रदर्शनों के दौरान सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है और ईरानी नागरिकों के खिलाफ हो रही हिंसा से वह भयभीत और स्तब्ध हैं. तुर्क ने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग, गोलीबारी, गिरफ्तारियां और इंटरनेट बंद करना अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों का गंभीर उल्लंघन है. उन्होंने ईरान से अपील की कि वह तुरंत हिंसा रोके और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करे.
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव
इसी बीच ईरान ने अमेरिका को सख्त संदेश दिया है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अल जज़ीरा को दिए इंटरव्यू में कहा कि अगर वॉशिंगटन सैन्य विकल्प को फिर से परखना चाहता है तो वह पहले भी ऐसा कर चुका है और हम उसके लिए पूरी तरह तैयार हैं. अराघची के इस बयान को अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के रूप में देखा जा रहा है. खासकर ऐसे समय में जब ईरान के अंदर हालात बेहद अस्थिर हैं और अंतरराष्ट्रीय दबाव लगातार बढ़ रहा है.
इसे भी पढ़ें. ‘सत्यमेव जयते’, ’10-मिनट डिलीवरी’ ब्रांडिंग हटाने पर राघव चड्ढा ने केंद्र का जताया आभार