Washington: अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव बढ गया है. इस बार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सीधे ईरान से युद्ध करने की तैयारी में हैं. तनाव की एक बड़ी वजह ईरान का परमाणु कार्यक्रम भी है. जून 2025 में हुए 12 दिन के युद्ध के बाद ईरान से जुड़े 400 किलो समृद्ध यूरेनियम जो करीब 10 परमाणु हथियारों के बराबर माना जाता है, अब भी लापता बताया जा रहा है. ईरान की सरकारी मीडिया के मुताबिक अब तक 3117 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.
अमेरिका और इजरायल दोनों की चिंता
इस मुद्दे पर ईरान का सख्त रुख अमेरिका और इजरायल दोनों की चिंता बढ़ा रहा है. जानकारी मिली है कि अमेरिका का शक्तिशाली USS अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप अब अरब सागर से होते हुए फारस की खाड़ी की ओर बढ़ रहा है. इस स्ट्राइक ग्रुप में गाइडेड मिसाइल डेस्ट्रॉयर, हमलावर पनडुब्बियां और अत्याधुनिक लड़ाकू विमान शामिल हैं.
ट्रांसपोंडर (लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम) भी बंद
बताया जा रहा है कि इस बेड़े को दक्षिण चीन सागर से मोड़ा गया और दुश्मनों की नजर से बचने के लिए इसके ट्रांसपोंडर (लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम) भी बंद कर दिए गए हैं. वहीं दूसरी ओर अमेरिका के इस कदम के साथ ही इजरायल भी हाई अलर्ट मोड में आ गया है. F-15E स्ट्राइक ईगल फाइटर जेट्स पश्चिम एशिया में तैनात कर दिए गए हैं. KC-135 रिफ्यूलर टैंकर लंबी दूरी के हवाई हमलों के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं.
अमेरिका और उसके सहयोगी किसी भी हालात के लिए तैयार
THAAD और पैट्रियट एंटी.मिसाइल सिस्टम इजरायल और कतर जैसे अमेरिकी सहयोगी देशों में सक्रिय कर दिए गए हैं. इससे साफ है कि अमेरिका और उसके सहयोगी किसी भी हालात के लिए तैयार रहना चाहते हैं. अमेरिका का यह सैन्य कदम सीधे तौर पर ईरान में जारी विरोध-प्रदर्शनों से जुड़ा माना जा रहा है. ईरान की सरकारी मीडिया के मुताबिक अब तक 3117 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि मरने वालों की संख्या 20,000 से भी ज्यादा हो सकती है. इन आंकड़ों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सवाल उठ रहे हैं.
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