होर्मुज से यमन तक मचा बवाल, हूतियों ने दागें 14 मिसाइलें, छोड़े कई ड्रोन

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
Iran US War: अमेरिका और ईरान लगातार एक-दूसरे को नई सैन्य कार्रवाई की धमकी दे रहें है. हाल के हफ्तों में दोनों देशों के बीच सबसे भीषण सैन्य टकराव देखने को मिला है. दरअसल, दक्षिणी ईरान में एक शादी समारोह पर अमेरिकी हमले का आरोप लगाया गया, जो इस तनाव का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि हमारी सेना ने रात में ईरान के कई ठिकानों पर बहुत भारी हमला किया.  इसके साथ ही उन्होंने ये चेतावनी भी दी कि अमेरिका जब चाहे, इस तरह की एक और कार्रवाई कर सकता है. इसके अलावा डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ समय के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य का नाम बदलकर ट्रंप स्ट्रेट रखने की बात भी कही है.

अमेरिका की मौजूदा व्यवस्था की नींव को हिला सकती है ईरानी रणनीति 

वहीं, ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रमुख मोहसेन रेजाई ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा है कि ईरान अब युद्ध, कूटनीति और आर्थिक नाकेबंदी से निपटने के लिए नई रणनीति अपनाएगा. रेजाई ने कहा कि आने वाले समय में ईरान की नई रणनीति अमेरिका की मौजूदा व्यवस्था की नींव को हिला सकती है. साथ ही ईरान ने अमेरिका पर दक्षिणी ईरान के सिरिक इलाके में एक शादी समारोह को निशाना बनाने को युद्ध अपराध बताया है.
हालांकि इस मामले को लेकर अमेरिकी सेना का कहना है कि उसकी नीति नागरिकों को निशाना बनाने की नहीं है. फिलहाल, ईरान ने इस हमले के जवाब में जॉर्डन, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, बहरीन और इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर भी हमले किए.

हूतियों ने दागीं 14 बैलिस्टिक मिसाइलें 

इसके अलावा, यमन की सेना के मीडिया केंद्र के एक नए अपडेट के मुताबिक, हूती विद्रोहियों ने देश के पश्चिमी तटीय प्रांतों ताएज और होदेइदाह के घनी आबादी वाले इलाकों को निशाना बनाकर 14 बैलिस्टिक मिसाइलें और कई ड्रोन दागे हैं. इन लगातार हमलों से तटीय क्षेत्रों में सुरक्षा को लेकर चिंताएं काफी बढ़ गई हैं.

ऑस्ट्रेलिया ने होर्मुज पर ईरान के प्रतिबंधों को ठहराया गलत

वहीं, ऑस्ट्रेलियाई उपप्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स ने भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को जल्द ही फिर से खोलने की मांग की है. उन्होंने ईरान पर इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से जहाजों की आवाजाही को प्रतिबंधित करने का आरोप लगाते हुए इसे पूरी तरह से अस्वीकार्य बताया है. रिचर्ड मार्ल्स ने कहा कि ईरान का यह कदम संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS) और नेविगेशन की स्वतंत्रता के सिद्धांतों के सरासर खिलाफ है.

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