Island with Banned Baths: क्या आप किसी ऐसी जगह के बारे में सोच सकते हैं, जहां पर लोगों को रहने के लिए बेसिक जरूरत के लिए भी नियम-कानून तय किए गए हों. जी हां. एक ऐसी जगह है, जहां लोगों को निर्देश दिए गए हैं कि वे पानी का कितना इस्तेमाल करें. दिलचस्प बात ये है कि यहां लोगों के लिए नहाने पर भी मनाही है यहां तक की वो टॉयलेट में भी खुलकर पानी का इस्तेमाल नहीं कर सकते.
दरअसल, पानी बचाने के लिए निवासियों और पर्यटकों पर कई पाबंदियां लगाई गई हैं. द्वीप के पब द टैवर्न के शौचालय बंद कर दिए गए हैं और बाथटब के प्लग हटा दिए गए हैं, ताकि लोग नहाने में ज्यादा पानी खर्च न करें. कुछ लोग शॉवर के नीचे बाल्टी रखकर पानी इकट्ठा करते हैं और उसी पानी से शौचालय साफ करते हैं. तालाबों का पानी भी अब कुछ जरूरतों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है.
क्यों लगाए गए हैं ऐसे नियम?
बता दें कि ब्रिटेन के ब्रिस्टल चैनल में स्थित लुंडी द्वीप इन दिनों पानी की भारी किल्लत से जूझ रहा है. हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि यहां रहने वाले 28 लोगों को सुरक्षित स्थान पर भेजने यानी द्वीप खाली कराने तक की नौबत आ सकती है. द्वीप के जलाशयों में पानी का स्तर गिरकर महज 13 प्रतिशत रह गया था. इसे देखते हुए मुख्य भूमि से पानी मंगाया जा रहा है और अब वन्यजीवों के तालाबों का पानी भी इस्तेमाल करना पड़ रहा है.
रिपोर्ट के मुताबिक, लुंडी द्वीप का प्रबंधन करने वाले लैंडमार्क ट्रस्ट के अधिकारी डेरेक ग्रीन ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि ऐसी स्थिति आएगी, जब लोगों की जरूरतें पूरी करने के लिए तालाबों से पानी लेना पड़ेगा. उन्होंने चेतावनी दी कि जल्द बारिश नहीं हुई तो द्वीप को खाली करने का फैसला लेना पड़ सकता है. ऐसा द्वीप के इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ है.
6 महीने से पानी का इंतजार
करीब 3.1 मील लंबे इस द्वीप पर पफिन पक्षियों और सील समेत कई तरह के वन्यजीव रहते हैं. यहां पानी की जरूरत बारिश के पानी और जमीन के भीतर चट्टानों में खोदे गए बोरहोल से पूरी होती है, लेकिन अप्रैल के बाद से यहां अच्छी बारिश नहीं हुई. सामान्य तौर पर इस समय तक जितनी बारिश होती है, उसकी तुलना में इस साल बेहद कम पानी मिला है. जल संकट से निपटने के लिए अगस्त से मुख्य भूमि से जहाज के जरिए पानी पहुंचाया जा रहा है.
द्वीप पर सड़कें सीमित हैं और वाहन भी बहुत कम हैं, ऐसे में पानी पहुंचाना भी मुश्किल हो रहा है. तालाब के पानी के इस्तेमाल से जलाशय का स्तर बढ़कर 23.7 प्रतिशत हुआ है, लेकिन संकट अभी टला नहीं है. ऐसे में बदलते मौसम के बीच भविष्य के लिए ज्यादा पानी जमा करने और पानी की खपत घटाने की तैयारी करनी होगी.

