Iran-US War: इजरायल ने साफ कर दिया है कि वह ईरान में किसी भी जमीनी यानी ग्राउंड ऑपरेशन का हिस्सा नहीं बनेगा. अमेरिका ईरान पर जमीनी हमले की योजना बना रहा है, लेकिन इजरायल ने अपने सैनिकों को इस जंग से बाहर रखने का फैसला किया है. इजरायली डिफेंस फोर्स (IDF) ने मंगलवार को कहा कि बुधवार तक ईरान के उन सभी ठिकानों को खत्म कर दिया जाएगा, जिन्हें ‘क्रिटिकल’ और ‘जरूरी’ कैटेगरी में रखा गया था.
ईरान की सैन्य क्षमता को बड़ा झटका
यह इजरायल की ओर से तय की गई एक तरह की डेडलाइन है. इस कार्रवाई के बाद ईरान की सैन्य क्षमता को बड़ा झटका लगने की उम्मीद है. इजरायल का कहना है कि उसने युद्ध से पहले जो टारगेट तय किए थे, उनमें से 60 से 70 परसेंट को पहले ही तबाह कर दिया है. अब बाकी बचे महत्वपूर्ण ठिकानों पर हमले तेज कर दिए गए हैं.
इजरायल के लिए खतरा थे टारगेट
इजरायल ने अपने हमलों को दो मुख्य श्रेणियों में बांटा है. पहली श्रेणी ‘क्रिटिकल’ टारगेट की है. इसमें वे ठिकाने शामिल हैं जो सीधे तौर पर इजरायल के अस्तित्व के लिए खतरा थे. जैसे कि ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल इंडस्ट्री और परमाणु प्रोग्राम से जुड़े कुछ बचे हुए अहम केंद्र. दूसरी श्रेणी ‘जरूरी’ यानी एसेंशियल ठिकानों की है. ये ठिकाने ईरान के मिलिट्री-इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स का हिस्सा हैं.
इजरायल की बढ़त को चुनौती
हालांकि ये तुरंत इजरायल पर हमला नहीं कर सकते, लेकिन ईरान की लंबी दूरी के हथियारों की क्षमता के लिए ये बहुत जरूरी हैं. इसमें सैटेलाइट लॉन्चिंग पैड और रिसर्च सेंटर शामिल हैं, जो इजरायल की रणनीतिक बढ़त को चुनौती देते थे. जानकारों का मानना है कि इजरायल लेबनान और गाजा में पहले से ही मोर्चा खोले हुए है, ऐसे में ईरान की धरती पर जाकर लड़ना उसके लिए बड़ा रिस्क हो सकता है.
इजरायल के लिए चिंता का विषय
IDF का मानना है कि ईरान अब भी हर दिन 5 से 20 मिसाइलें दागने की क्षमता रखता है. यह इजरायल के लिए चिंता का विषय है क्योंकि वह ईरान की मिसाइल क्षमता को पूरी तरह खत्म नहीं कर पाया है. मौजूदा हालात को देखते हुए इजरायल ने अपनी रणनीति बदल ली है. वह दक्षिणी लेबनान में अपने बफर जोन को और बढ़ाने पर काम कर रहा है ताकि उसकी सीमाएं सुरक्षित रहें.
इसे भी पढ़ें. स्पेन के बाद इटली से भी अमेरिका को लगा झटका, ईरान युद्ध में अपनी जमीन के इस्तेमाल से किया इनकार

