Jaishankar on Terrorism: आतंकवाद के मुद्दे को लेकर भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि आतंकवाद को लेकर भारत की चिंताओं के प्रति अमेरिका का असंवेदनशील होना दोनों देशों के रिश्तों के लिए एक समस्या है. भारत के लिए आतंकवाद बेहद संवेदनशील मुद्दा है और यदि इसे उस तरह से नहीं समझा जाएगा, तो ये रिश्तों को प्रभावित कर सकता है.
एस. जयशंकर ने बिना किसी देश का नाम लिए एक पड़ोसी देश (पाकिस्तान) का जिक्र किया, जो आतंकवाद को अपनी नीति के तौर पर इस्तेमाल करता है. उनकी यह टिप्पणी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पाकिस्तान के साथ बढ़ती नजदीकियों की आलोचना के तौर पर देखी गई है. जबकि पाकिस्तान की आतंकवाद से जुड़ी भूमिका को नजरअंदाज किया गया.
एस जयशंकर ने बताया रिश्तों के मायने
भारतीय विदेश मंत्री ने यहां पर आतंकवाद को लेकर कहा कि ‘शायद बहुत कम देश ऐसे होंगे जिन्होंने उस तरह के आतंकवाद का सामना किया हो, जैसा हमने एक पड़ोसी देश से किया है. यह कई दशकों से जानबूझकर अपनाई गई नीति का हिस्सा रहा है.’ इसी वजह से आतंकवाद का मुद्दा भारत के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि यदि कोई मुद्दा हमारे लिए इतना ज्यादा मायने रखता है और उसे लेकर पर्याप्त समझ, संवेदनशीलता या सहानुभूति नहीं है, तो मुझे लगता है कि इससे समस्या पैदा होती है.
आतंकवाद पर साथ न देने वालों से कैसा रिश्ता?
उन्होंने कहा कि यदि मेरी सबसे बड़ी चिंताओं में से किसी एक को मेरा साझेदार पूरी तरह नहीं समझता है, तो जाहिर तौर पर इसका असर रिश्तों पर पड़ता है. भारत और अमेरिका के रिश्तों को और बेहतर बनाने में आ रही रुकावटों को लेकर किए गए सवाल पर एस जयशंकर ने कहा कि व्यापार के अलावा आतंकवाद को लेकर भारत की चिंताओं के प्रति पर्याप्त संवेदनशीलता न होना भी एक अहम मुद्दा है.