टायसन से ठोकी आतंकियों के ताबूत में कील, एक डॉग की शहादत से कामयाब हुआ ‘ऑपरेशन त्राशी-1’

Jammu-Kashmir : जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF की संयुक्त टीम ने ऑपरेशन त्राशी-1 में बड़ी कामयाबी हासिल की है. बता दें कि इस ऑपरेशन में पाकिस्तानी जैश-ए-मोहम्मद के तीन आतंकवादियों को मार गिराया गया, बताया जा रहा है कि इनमें से एक मोस्ट वांटेड कमांडर सैफुल्लाह भी शामिल था, जो 20 बार गिरफ्तारी से बच चुका था. सबसे महत्‍वपूर्ण बात यह है कि इस पूरी कार्रवाई में सुरक्षा बलों की ओर से कोई मानवीय हताहत नहीं हुआ, सिर्फ बहादुर स्निफर डॉग टायसन को चोट लगी, जिसने ऑपरेशन की शुरुआत की थी.

ऑपरेशन को दिया अंजाम

ऐसे में मीडिया से बातचीत के दौरान भारतीय सेना ने बताया कि ऑपरेशन त्राशी-1 की शुरुआत जनवरी 2026 में हुई थी, जब यह जानकारी सामने आयी थी कि चत्रू इलाके के जंगलों में पाकिस्तानी आतंकवादी छिपे हुए हैं. व्हाइट नाइट कोर के काउंटर इंसर्जेंसी फोर्स (CIF) डेल्टा की अगुवाई में यह अभियान चला. प्राप्‍त जानकारी के अनुसार एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में CIF डेल्टा के GOC मेजर जनरल ए पी एस बाल, एसएम का कहना है कि ‘यह ऑपरेशन दृढ़ता, स्पष्ट सोच, सही प्लानिंग और महीनों की मेहनत का नतीजा है. सभी एजेंसियों की जॉइंट अप्रोच और सभी स्तरों पर बेजोड़ समन्वय से यह सफल हुआ.’

आतंकवादियों की लोकेशन ट्रैक करने में सबसे आगे टायसन

उन्होंने ये भी बताया कि ‘हमने शांत, संयमित और सहयोगी तरीके से काम किया, जिसकी वजह से बिना किसी जवान को नुकसान पहुंचे सफलता मिली, सिवाय बहादुर डॉग टायसन की.’ बता दें कि टायसन एक स्निफर डॉग था, जो कि आतंकवादियों की लोकेशन ट्रैक करने में सबसे आगे था. मुठभेड़ के दौरान उसे चोट लगी और बाद में उसकी मौत हो गई.

AK-47 समेत कई हथियार बरामद

इसके साथ ही मारे गए तीन आतंकवादियों में सैफुल्लाह प्रमुख था, जो जैश का टॉप कमांडर था. बाकी के दोनों पाकिस्तानी मूल के थे. जानकारी के मुताबिक, आतंकवादियों ने पहले फायरिंग शुरू की, जिसके जवाब में सुरक्षा बलों ने उन्हें घेर लिया. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार तीव्र गोलीबारी के बाद तीनों के शव जले हुए हालत में बरामद हुए. मौके से दो AK-47 राइफलें, ग्रेनेड, गोला-बारूद और अन्य युद्ध सामग्री बरामद की गई.

इलाके में सर्च ऑपरेशन तेज

बता दें कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में जम्मू-कश्मीर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे. उन्होंने बताया कि यह ऑपरेशन इंटेलिजेंस ब्यूरो, आर्मी इंटेलिजेंस और स्थानीय पुलिस की मिली-जुली मेहनत का परिणाम है. इसके बाद से अब सर्च ऑपरेशन और भी तेज कर दिया गया है ताकि कोई और आतंकवादी न बचे. इसके साथ ही स्थानीय लोगों से अपील की गई है कि वे किसी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी दें.

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