जापान के समुद्र में मिला सोने का भंडार, जापानी वैज्ञानिकों में जगी समुद्र के नीचे खनन की नई उम्मीद

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Japan Gold Mine:जापान के वैज्ञानिकों ने समुद्र के अंदर दुनिया का सबसे समृद्ध गोल्ड भंडार की खोज की है. लेकिन खास बात यह है कि यहां मौजूद ज्यादातर सोना आंखों से दिखाई ही नहीं देता. यह चट्टानों के अंदर परमाणु और बेहद छोटे कण के रूप में छिपा है. जापानी वैज्ञानिकों के इस खोज ने समुद्र के नीचे खनन की नई उम्मीदें जरूर जगा दी हैं. ऐसे में सभी के मन में ये सवाल है कि क्या इससे जापान मालामाल हो जाएगा? जवाब फिलहाल इतना आसान नहीं है.

दरअसल, टोक्यो से करीब 350 किलोमीटर दक्षिण में स्थित हिगाशी-आओगाशिमा नाम के डूबे हुए ज्वालामुखीय क्रेटर में वैज्ञानिकों को सक्रिय हाइड्रोथर्मल वेंट्स मिले हैं, जो समुद्र की गहराई में गर्म, धातुओं से भरपूर तरल पदार्थ बाहर निकालते हैं और इसी प्रक्रिया के दौरान सोना भी बन रहा है.

आखिर क्यों इतनी खास है यह खोज?

रिपोर्ट के मुताबिक, इस जगह की सबसे बड़ी खासियत इसकी असाधारण सोने की सघनता है. शोधकर्ताओं के अनुसार, यहां मौजूद पायराइट खनिज में दुनिया में अब तक दर्ज की गई सबसे अधिक सोने की मात्रा मिली है. बता दें कि पायराइट को मूर्खों का गोल्ड कहा जाता है, क्योंकि यह सोने जैसा दिखता है. वहीं, सोना भी यहां सामान्य रूप में नहीं है. इसका एक हिस्सा बेहद छोटे नैनोपार्टिकल्स के रूप में मौजूद है, जबकि दूसरा पायराइट की रासायनिक संरचना में न्यूक्लियर लेवल पर घुला हुआ है. हालांकि एक ही स्थान पर सोने के ये दोनों रूप मिलना बेहद दुर्लभ माना जाता है. यही वजह है कि यह सोना सामान्य माइक्रोस्कोप से दिखाई भी नहीं देता.
वहीं, इसे खोजने के लिए वैज्ञानिकों ने सेकेंडरी-आयन मास स्पेक्ट्रोमेट्री (SIMS) एडवांस्ड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया, जिससे कई वैज्ञानिक इसे ‘अदृश्य सोना’ भी कहते हैं. इसके अलावा यह क्रेटर जापान के दूसरे समुद्री खनिज क्षेत्रों की तुलना में अपेक्षाकृत कम गहराई पर है और टोक्यो से ज्यादा दूर भी नहीं है. इसलिए भविष्य में यदि तकनीक विकसित होती है तो यहां खनन करना दूसरे समुद्री इलाकों के मुकाबले आसान हो सकता है.

जापान की सोना निकालने में  3 मुश्किलें?

  • सोना निकालने के लिए जापान के सामने सबसे बड़ी चुनौती टेक्नोलॉजी की है. वैज्ञानिक अभी तक ऐसा सस्ता और प्रभावी तरीका नहीं बना पाए हैं, जिससे इस अदृश्य सोने को समुद्र की चट्टानों निकाला जा सके.
  • वहीं, दूसरी चुनौती आर्थिक है. दरअसल, समुद्र के अंदर खनन बेहद महंगा काम है. इसका उदाहरण पापुआ न्यू गिनी में देखने को मिल चुका है, जहां समुद्र के नीचे सोना निकालने के एक प्रोजेक्ट को आर्थिक संकट और विरोध प्रदर्शनों के कारण बंद करना पड़ा था. उस असफल प्रोजेक्ट से देश को लगभग 8.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर का नुकसान हुआ था.
  • इसके अलावा, तीसरी और शायद सबसे बड़ी चुनौती पर्यावरण है. समुद्र की गहराई में मौजूद हाइड्रोथर्मल वेंट्स को कई वैज्ञानिक समुद्री जैव विविधता के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानते हैं. यही वजह है कि कई प्रशांत देशों ने 2030 तक गहरे समुद्र में खनन पर रोक लगाने का समर्थन किया है.

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