Tokyo: जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने कहा है कि अगर ताइवान में कोई बड़ा संकट पैदा होता है और वहां अमेरिकी सेना पर हमला किया जाता है तो जापान मूकदर्शक नहीं बनेगा. ऐसी स्थिति में दखल देगा. ताकाइची ने ताइवान को लेकर बेहद सख्त और स्पष्ट रुख अपनाया है. उन्होंने जोर देकर कहा कि ताइवान का मामला सिर्फ एक क्षेत्रीय विवाद नहीं बल्कि जापान की सुरक्षा और उसके अंतरराष्ट्रीय रिश्तों से जुड़ा हुआ है.
चीन ने जताई थी कड़ी नाराजगी
पिछले साल नवंबर में भी ताकाइची ने जापानी संसद में भी कहा था कि ताइवान के खिलाफ चीन की नाकेबंदी या सैन्य कार्रवाई जापान के अस्तित्व के लिए खतरा हो सकती है. इस पर चीन ने कड़ी नाराजगी जताई थी. टोक्यो में एक टीवी कार्यक्रम के दौरान ताकाइची ने कहा कि ऐसी स्थिति में अगर जापान ने कुछ नहीं किया तो अमेरिका के साथ उसका सुरक्षा गठबंधन कमजोर पड़ जाएगा.
अमेरिका के साथ मिलकर संयुक्त अभियान
ताकाइची ने यह भी कहा कि आपात स्थिति में ताइवान में फंसे जापानी और अमेरिकी नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए अमेरिका के साथ मिलकर संयुक्त अभियान चलाया जा सकता है. अगर अमेरिकी सेना पर हमला होता है और हम दूरी बनाते हैं तो फिर हमारे गठबंधन का कोई मतलब नहीं रह जाएगा. प्रधानमंत्री ने यह भी साफ किया कि सैन्य हमले जैसी इमरजेंसी में जापान हालात का आकलन करेगा और मौजूदा कानूनों के दायरे में रहकर जवाब देगा.
नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी
ताकाइची का कहना था कि नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है. ताकाइची का यह बयान ऐसे समय आया है जब चीन लगातार ताइवान पर अपना नियंत्रण जताने के संकेत दे रहा है. इससे ताइवान पर संभावित चीनी सैन्य कार्रवाई की आशंका और गहरी हो गई है. पिछले साल नवंबर में भी ताकाइची ने जापानी संसद में कहा था कि ताइवान के खिलाफ चीन की नाकेबंदी या सैन्य कार्रवाई जापान के अस्तित्व के लिए खतरा हो सकती है. उस बयान पर चीन ने कड़ी नाराजगी जताई थी और दोनों देशों के बीच राजनयिक तनाव बढ़ गया था.
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