लेबनान में 51 साल बाद चली ट्रेन, आखिर क्यों इस देश में थम चुकी थी रेलवे की रफ्तार

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Lebanon: इजरायली हमलों से जूझ रहे मिडिल ईस्ट के देश लेबनान में करीब 51 साल बाद ट्रेन चली है. कभी अपने सुनहरे दौर से गुजरने वाले लेबनान के रेल ट्रांसपोर्ट में लगभग 5 दशक बाद जो ट्रेन आई है, उसे देखकर पहली नजर को आपको लगेगा कि यह तो कोई खिलौना है.

दरअसल, लेबनान में आई नई मॉडल ट्रेन का नाम बारा है, जो सोलर इनर्जी से चलने वाली ट्रेन है. यह बारबारा से मडफून तक चलेगी, जिसकी दूरी केवल 3.5 किलोमीटर की है. बता दें कि यह टूरिज्म के लिए जाना जाने वाला इलाका है और लेबनान की सरकार इसी की बदौलत टूरिज्म को बढ़ावा देना चाहती है. दरअसल, बारा ट्रेन सिर्फ 15 से 20 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलती है.

कभी सुनहरा दौर में था लेबनान का रेल नेटवर्क

बता दें कि आज जो लेबनान में ट्रेन ट्रांसपोर्ट की हालत है वह हमेशा से ऐसा नहीं था. दरअसल, अगस्त 1895 में, पहली स्टीम ट्रेन बेरूत से चली थी और बेका घाटी से होते हुए आज के सीरिया की सीमा के पास स्थित रायाक स्टेशन तक गई. यह लेबनान में रेल ट्रांसपोर्ट का सुनहरा दौर था. लेबनान का 408 किलोमीटर लंबा रेलवे नेटवर्क कभी बेरूत को सीरिया के दमिश्क और आज के इजरायल के तटीय शहर हाइफा से जोड़ता था. लेकिन आज, वहां जर्जर स्टेशन की इमारतों और जंग लगे इंजनों के अलावा कुछ नहीं बचा है.

रिपोर्ट के मुताबिक, साल 1975 से 1990 तक चले लेबनान के गृह युद्ध ने देश में रेल ट्रांसपोर्ट को पूरी तरह खत्म कर दिया. गृह युद्ध के दौरान लड़ रहे गुटों ने कुछ ट्रेन स्टेशनों को नष्ट कर दिया. कुछ को बाद में हाईवे प्रोजेक्ट्स के लिए बुलडोजर से गिरा दिया गया; और कुछ को बस यूं ही छोड़ दिया गया. अल-जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, रायाक और त्रिपोली स्टेशनों पर ऐतिहासिक इंजन जंग खा रहे हैं, जबकि यूरोप में ऐसे ही इंजन म्यूजियम में संभालकर रखे गए हैं.

ट्रेन को शुरू करने पर भी हो रही आलोचना

वहीं, सिर्फ 3.5 किमी के लिए शुरू नई मॉडल ट्रेन की भी लेबनान में आलोचना हो रही है. लेबनान नेशनल रेलवे अथॉरिटी के जनरल डायरेक्टर ज़ियाद शिया ने ‘बारबरा’ टूरिस्ट ट्रेन प्रोजेक्ट की आलोचना का जवाब देते हुए कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद, यह पहल लेबनान के रेलवे सिस्टम को फिर से शुरू करने और ट्रेनों की वापसी की उम्मीद जगाने की दिशा में एक कदम है.

रिपोर्ट के अनुसार, शिया ने एक बयान में कहा कि “बारबरा टूरिस्ट ट्रेन की शुरुआत रेलवे के कुछ हिस्सों को फिर से जीवंत करने की दिशा में एक कदम है. यह उन नागरिकों के सहयोग और समर्पण का नतीजा है जो अपने देश की विरासत और यादों को संजोने के लिए प्रतिबद्ध हैं. यह पहल भले ही छोटे पैमाने पर शुरू की गई हो, लेकिन इसके परिणाम बहुत महत्वपूर्ण हैं. इसे सीमित संसाधनों और उपेक्षित व अतिक्रमण वाली जगहों को वापस पाने की सामूहिक इच्छाशक्ति से हासिल किया गया है.”

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