Major Abhilasha Barak: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेजर अभिलाषा बराक को ‘संयुक्त राष्ट्र मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर अवॉर्ड’ मिलने पर बधाई दी है, साथ ही उनकी ‘उत्कृष्ट सेवा’ की सराहना की. पीएम मोदी ने कहा कि यह उपलब्धि भारतीय युवाओं, खासकर उन लड़कियों के लिए प्रेरणा है जो समाज और देश की सेवा करना चाहती हैं. बता दें कि मेजर बराक भारत की पहली महिला कॉम्बैट हेलीकॉप्टर पायलट हैं और भारत की तीसरी महिला अधिकारी हैं, जिन्हें यह मिलिट्री जेंडर एडवोकेट अवॉर्ड मिला है.
पीएम मोदी ने मेजर बराक को दी बधाई
पीएम मोदी ने ‘एक्स’ पर लिखा कि ‘मेजर अभिलाषा बराक को ‘संयुक्त राष्ट्र मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर अवॉर्ड’ मिलने पर बधाई. मेजर बराक लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल (यूएनआईएफआईएल) के तहत एंगेजमेंट टीम कमांडर और जेंडर फोकल प्वाइंट के रूप में सेवा दे रही हैं. यह सम्मान उनकी बेहतरीन सेवाऔर संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में भारत के लंबे योगदान को भी दिखाता है. उनकी यह उपलब्धि कई भारतीय युवाओं के लिए प्रेरणा है, खासकर उन बेटियों के लिए जो देश और मानवता की सेवा करना चाहती हैं.’
Congratulations to Major Abhilasha Barak on being conferred the UN Military Gender Advocate of the Year Award. Major Barak is serving as an Engagement Team Commander and Gender Focal Point within the United Nations Interim Force in Lebanon (UNIFIL). This honour is a recognition… pic.twitter.com/00Yyv963GT
— Narendra Modi (@narendramodi) June 7, 2026
भारत की पहली महिला कॉम्बैट हेलीकॉप्टर पायलट
बता दें कि मेजर बराक भारत की पहली महिला कॉम्बैट हेलीकॉप्टर पायलट हैं. उन्हें शांति मिशन में महिलाओं की भूमिका और उनके दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए ‘संयुक्त राष्ट्र के 2005 मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने पुरस्कार देते हुए कहा कि मेजर बराक ‘उन लोगों के लिए एक आदर्श हैं जिनकी आप सेवा करती हैं और जिनके साथ आप काम करती हैं.’
उन्होंने आगे कहा कि स्थानीय समुदायों के साथ भरोसा बनाकर उन्होंने शुरुआती अलार्मिंग नेटवर्क बनाने में मदद की, जिससे नागरिकों की सुरक्षा मजबूत हुई. एक फ्रंटलाइन कमांडर के रूप में उन्होंने हजारों महिलाओं और लड़कियों से जुड़कर उन्हें कौशल प्रशिक्षण, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े कार्यक्रमों का लाभ दिलाया, जिससे उनकी जिंदगी बदली है.
सपनों का कोई जेंडर नहीं होताः मेजर बराक
इस सम्मान के मिलने के बाद मेजर बराक ने कहा कि सपनों का कोई जेंडर नहीं होता, और न ही नेतृत्व, साहस या मानवता की सेवा करने की इच्छाशक्ति का कोई जेंडर होता है. लेबनान अभी यूएन का सबसे खतरनाक शांति-स्थापना वाला इलाका है. ऐसे में यह पुरस्कार इस बात की याद दिलाता है कि स्थायी शांति तभी बन सकती है जब हर आवाज सुनी जाए और हर व्यक्ति को आगे बढ़ने का मौका मिले.
कौन हैं मेजर अभिलाषा बराक ?
- मेजर बराक भारत की तीसरी महिला अधिकारी हैं, जिन्हें यह मिलिट्री जेंडर एडवोकेट अवॉर्ड मिला है. उनसे पहले मेजर सुमन गवानी और मेजर राधिका सेन को यह सम्मान मिल चुका है.
- मेजर बराक यूएनआईएफआईएल में भारतीय बटालियन के साथ एंगेजमेंट टीम कमांडर और जेंडर फोकल प्वाइंट के रूप में तैनात हैं. यह मिशन इजरायल और लेबनान की सीमा पर तैनात है और वर्तमान में सबसे जोखिमभरा शांति मिशन माना जाता है.
- संयुक्त राष्ट्र में मेजर बराक की यह ऐतिहासिक उपलब्धि भारतीय सशस्त्र बलों में उनके पहले से ही शानदार करियर की एक और कड़ी है. बता दें कि 2018 में आर्मी एयर डिफेंस कोर में कमीशन प्राप्त करने के बाद उन्होंने 2022 में नासिक स्थित कॉम्बैट आर्मी एविएशन ट्रेनिंग स्कूल से ग्रेजुएशन की उपाधि प्राप्त करके इतिहास रच दिया था.
- अपने सैन्य करियर को याद करते हुए मेजर बराक ने कहा कि ‘भारतीय सेना की पहली महिला कॉम्बैट हेलीकॉप्टर पायलट होने के नाते मैंने खुद अनुभव किया कि जब अवसर मिलता है तो महिलाएं कैसे हर बाधा को पार कर सकती हैं और बड़े मुकाम हासिल कर सकती हैं.’