Bangladesh Measles Outbreak: बांग्लादेश में खसरे का कहर जारी, 24 घंटे में 4 और बच्चों की मौत; मृतकों का आंकड़ा 820 पहुंचा

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Bangladesh Measles Outbreak: बांग्लादेश में खसरे (मीजल्स) का प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है. संक्रमण की रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रही है और हर दिन बड़ी संख्या में नए मामले सामने आ रहे हैं. रविवार सुबह 8 बजे (स्थानीय समय) तक पिछले 24 घंटों में खसरे जैसे लक्षणों वाले चार और बच्चों की मौत दर्ज की गई. इसके साथ ही देश में खसरे से जुड़ी पुष्टि और संदिग्ध मौतों की कुल संख्या बढ़कर 820 हो गई है. स्वास्थ्य विभाग के ताजा आंकड़े बताते हैं कि अस्पतालों पर मरीजों का दबाव लगातार बढ़ रहा है और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है.

24 घंटे में चार और बच्चों की मौत

स्थानीय मीडिया के अनुसार, स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) ने पिछले 24 घंटों में हुई चारों मौतों को संदिग्ध खसरा मौत की श्रेणी में रखा है. इसके बाद संदिग्ध मौतों की संख्या बढ़कर 725 हो गई है, जबकि प्रयोगशाला में पुष्टि किए गए खसरे से मरने वालों की संख्या 95 पर स्थिर बनी हुई है.

24 घंटे में 990 नए संदिग्ध मामले

रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में देशभर में खसरे के 990 नए संदिग्ध मामले दर्ज किए गए हैं. इसके साथ ही कुल संदिग्ध मामलों की संख्या बढ़कर 1,23,753 हो गई है. वहीं, इसी अवधि में 170 नए मामलों की प्रयोगशाला में पुष्टि हुई, जिससे कुल पुष्ट संक्रमितों की संख्या 15,442 तक पहुंच गई. DGHS के अनुसार, 15 मार्च से अब तक खसरे के संदिग्ध 1,06,239 मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. इनमें से 1,02,467 मरीज इलाज के बाद स्वस्थ होकर अपने घर लौट चुके हैं.

हर दिन औसतन चार बच्चों की हो रही मौत

रिपोर्ट में बताया गया है कि बांग्लादेश में खसरे से हर दिन औसतन करीब चार बच्चों की मौत हो रही है. इसके अलावा प्रतिदिन 800 से अधिक मरीज अस्पतालों में भर्ती हो रहे हैं. सरकार का कहना है कि आपातकालीन टीकाकरण अभियान ने तय लक्ष्य को पार कर लिया है, लेकिन अस्पतालों में अब भी बड़ी संख्या में ऐसे बच्चे पहुंच रहे हैं, जिन्हें खसरे का टीका नहीं लगा है. इससे टीकाकरण अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

जुलाई के पहले तीन सप्ताह में भी स्थिति गंभीर

रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई के पहले तीन सप्ताह के दौरान प्रतिदिन औसतन 1,005 संदिग्ध और पुष्ट मामले सामने आए. इसी अवधि में औसतन 821 मरीज रोज अस्पताल में भर्ती हुए, जबकि लगभग चार बच्चों की प्रतिदिन मौत दर्ज की गई. यह आंकड़े बताते हैं कि संक्रमण अभी भी तेजी से फैल रहा है.

विशेषज्ञों ने जताई चिंता

मीजल्स और रूबेला उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय सत्यापन समिति के अध्यक्ष महमूदुर रहमान ने कहा, “टीकाकरण अभियान शुरू होने के दो महीने बाद भी हालात उम्मीद के मुताबिक नहीं सुधरे हैं और ऐसा लगता है कि अधिकारी इसकी गंभीरता को पूरी तरह नहीं समझ रहे हैं.” स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, करीब 40 लाख बच्चों के टीकाकरण से वंचित रह जाने, अभियान की लक्षित आयु सीमा से अधिक उम्र के बच्चों में संक्रमण फैलने और संक्रमण नियंत्रण के कमजोर उपायों के कारण यह प्रकोप लगातार बना हुआ है.

बे-नजीर अहमद ने क्या कहा?

पूर्व रोग नियंत्रण निदेशक और स्वास्थ्य विशेषज्ञ बे-नजीर अहमद ने कहा, “मीजल्स-रूबेला टीकाकरण और विटामिन-ए अभियान के आंकड़ों में करीब 40 लाख बच्चों का अंतर बेहद चौंकाने वाला है. इससे साफ है कि टीकाकरण का लक्ष्य ही पर्याप्त नहीं रखा गया था.” उन्होंने कहा, “कमजोर योजना और जनजागरूकता की कमी के कारण बड़ी संख्या में परिवार संशोधित टीकाकरण कार्यक्रम की जानकारी से वंचित रह गए, जिसका असर अब सामने आ रहा है.”

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