लाल ग्रह पर क्यों लंबे समय तक दिखाई देता है सूर्यास्त, नासा के क्यूरियोसिटी रोवर ने भेजीं अनोखी तस्वीर

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

NASA Mars Mission: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के क्यूरियोसिटी (Curiosity) रोवर ने मंगल से ऐसी ही अनोखी तस्वीरें भेजी हैं, जिसमें एक ही तस्वीर में मंगल का सूर्योदय और सूर्यास्त दोनों दिखाई दे रहा है. इस खास तस्वीर को क्यूरियोसिटी की मंगल ग्रह पर 5,000वें मार्सियन दिन के मौके पर तैयार किया गया है. इस तस्वीर में सुबह के हिस्से को नीले रंग और शाम के हिस्से को पीले रंग में दिखाया गया है. साथ ही यहां सूर्य पृथ्वी से छोटा दिखता है, वहीं देर तक सूर्यास्त और सूर्योदय दिखते हैं.

एक तस्वीर में मंगल की सुबह और शाम

नासा के मुताबिक, क्यूरियोसिटी ने 18 नवंबर 2025 को मंगल के अलग-अलग समय पर दो तस्वीरें खींचीं. एक तस्वीर सुबह के समय और दूसरी दोपहर में. इन दोनों ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीरों को बाद में जोड़कर एक पैनोरमा तैयार किया गया. इसके बाद सुबह वाले हिस्से को नीले और दोपहर वाले हिस्से को पीले रंग से रंगा गया. नतीजा ऐसा बना, जैसे मंगल पर एक ही वक्त सूर्योदय और सूर्यास्त हो रहा हो. यह तस्वीर असल में मंगल के आसमान के प्राकृतिक रंगों की सीधी तस्वीर नहीं है, बल्कि नासा की ओर से तैयार किया गया एक कलात्मक रूपांतरण है, जिसका मकसद तस्वीर में मौजूद बारीकियों को ज्यादा साफ दिखाना है.

मंगल पर क्यों छोटा दिखता है सूर्य?

मंगल सूर्य से धरती के मुकाबले ज्यादा दूर है. इसलिए वहां से देखने पर सूर्य हमें धरती की तुलना में छोटा दिखाई देता है. नासा के मुताबिक, मंगल से सूर्य का आकार धरती से दिखाई देने वाले आकार का करीब दो-तिहाई नजर आता है. लेकिन सबसे दिलचस्प बात सूर्य नहीं, बल्कि उसके आसपास का आसमान है. मंगल पर सूर्यास्त के वक्त आसमान में नीला रंग ज्यादा उभर सकता है. इसकी वजह मंगल के वातावरण में मौजूद बेहद महीन धूल है. यह धूल नीली रोशनी को सूर्य की दिशा के आसपास ज्यादा प्रभावी तरीके से दिखाई देने देती है, जबकि पीली और लाल रोशनी पूरे आसमान में ज्यादा फैलती है. इसी वजह से मंगल का सूर्यास्त धरती के सूर्यास्त से बिल्कुल अलग रंग का दिखाई दे सकता है.

पहली बार 1976 में इंसानों ने देखा था मंगल का सूर्यास्त

क्यूरियोसिटी ने दिखाईं सूर्य की किरणें

बता दें कि साल 2023 में क्यूरियोसिटी ने मंगल के सूर्यास्त के दौरान बादलों के बीच से आती सूर्य की किरणों को भी कैद किया था. इन्हें क्रेपस्क्युलर किरणें कहा जाता है. यह पहली बार था जब मंगल पर इन किरणों को इतनी स्पष्टता से देखा गया. ऐसी तस्वीरें सिर्फ खूबसूरत नजारा दिखाने के लिए नहीं ली जातीं. मंगल की सुबह, शाम और धुंधलके की तस्वीरों से वैज्ञानिक वहां के वातावरण में धूल और बर्फीले बादलों की ऊंचाई और फैलाव को समझने की कोशिश करते हैं.

मंगल पर लंबे समय तक क्यों रहती है शाम?

मंगल के वातावरण में ऊंचाई तक फैली धूल सूर्य की रोशनी को बिखेरती रहती है. इसी वजह से सूर्य के डूबने के बाद भी आसमान में हल्की चमक काफी देर तक बनी रह सकती है. नासा के अनुसार, यह धुंधलका सूर्यास्त के बाद करीब दो घंटे तक दिखाई दे सकता है और सूर्योदय से पहले भी लंबे समय तक बना रह सकता है. यानी लाल ग्रह पर सूरज का डूबना सिर्फ कुछ मिनटों का दृश्य नहीं. धूल से भरे मंगल के आसमान में रोशनी धीरे-धीरे फीकी पड़ती है और फिर अंधेरे में बदल जाती है.
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