NASA prediction: दुनिया की सबसे एडवांस स्पेस एजेसी NASA ने हाल ही में धरती को लेकर बड़े खतरे का संकेत दिया है. NASA की नई सैटेलाइट रिपोर्ट ने खुलासा किया है कि कुछ ऐसी तबाही मचने वाली है, जिससे साल 2050 तक दुनिया के नक्शे से कई शहर गायब हो जाएंगे. ये तबाही इतनी भयानक होगी कि सैकड़ों लोगों की मौत होगी और कई शहर आने वाले समय में ढूंढने से भी नहीं मिलेंगे.
नासा की रिपोर्ट में जिन शहरों का जिक्र है, वो ज्यादातर अमेरिका के तटीय इलाकों के हैं. यहां समुद्र का स्तर 1 फीट यानि 30 सेंटीमीटर तक बढ़ सकता है. कुछ इलाकों में तो यह बढ़ोतरी और भी ज्यादा भयानक हो सकती है. इसके कारण तूफान, बाढ़ और हाई टाइड्स का भयानक जंजाल उठेगा. यही वजह है कि कई शहरों के नामोनिशान मिटने का खतरा मंडरा रहा है.
किन-किन जगहों पर सबसे बड़ा संकट?
- NASA के दशकों पुराने सैटेलाइट डेटा और कोस्टल गेज रिकॉर्ड्स के विश्लेषण के मुताबिक, गल्फ कोस्ट पर इसका सबसे ज्यादा असर होने वाला है. यहां समुद्र का स्तर 14 से 18 इंच तक बढ़ सकता है.
- वहीं, न्यू ऑरलियंस, ह्यूस्टन, टाम्पा और मोबाइल जैसे शहर पहले से ही बाढ़ की चपेट में हैं और महज 24 साल बाद इन शहरों की सड़कें, घर और बंदरगाह हमेशा पानी में ही डूबे नजर आएंगे.
- इसके अलावा, दक्षिण-पश्चिमी अमेरिका में भी औसतन 12 इंच का उछाल आने वाला है. फ्लोरिडा, जॉर्जिया और साउथ कैरोलाइना के तटीय इलाके बुरी तरह प्रभावित होंगे और पानी-पानी हो जाएंगे.
- जबकि उत्तरी कोस्ट पर नॉरफोक जैसे शहरों में 10-14 इंच का स्तर बढ़ सकता है. न्यूयॉर्क, बोस्टन और मियामी पहले से ही हाई टाइड फ्लडिंग से जूझ रहे हैं. इनके लिए 2050 तक स्थिति और खतरनाक हो जाएगी.
- वहीं, वेस्ट कोस्ट पर जलस्तर फिर भी कम बढ़ेगा और 4-8 इंच तक रहेगा. लॉस एंजेलिस, सैन फ्रांसिस्को और सिएटल जैसे शहरों पर इसका असर पड़ेगा.
बढ़ रहा समुद्र का स्तर
NASA के मुताबिक, साल 2030 के कुछ महीने बीतने के बाद चांद की कक्षा में एक खास वॉबल आएगा, जो हर 18 साल में होता है. इस दौरान खास बात ये होगी कि इस बार यह हाई टाइड के साथ आएगा और समुद्र के बढ़े स्तर की वजह से छोटी-छोटी बाढ़ों को भयंकर रूप दे देगा. ऐसे में सड़कें, घर, एयरपोर्ट और मेट्रो पानी में डूबे रहेंगे. NASA के सैटेलाइट सेंटिनेल-6 और मशेल फ्रीलिच पिछले 30 साल से समुद्र की ऊंचाई नाप रहे हैं, जिसके डेटा पहले ही बता चुके हैं कि समुद्र का स्तर बढ़ रहा है, जिसकी वजह ग्लोबल वार्मिंग, ग्लेशियर पिघलना और महासागरों का फैलना है. ऐसे में वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी हैं कि यदि ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन नहीं रोका गया तो 2050 के बाद स्थिति और भयावह हो जाएगी.
इसके अलावा, तटीय इलाकों की बर्बादी, लाखों लोगों का विस्थापन और अरबों डॉलर का नुकसान होगा, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगा. वहीं, न्यू ऑरलियंस और मियामी का बड़ा हिस्सा हमेशा के लिए पानी में डूब सकता है. ह्यूस्टन और टाम्पा तूफानों की मार और ज्यादा खतरनाक हो जाएगी, जबकि नॉरफोक में अमेरिकी नौसेना का बेस भी खतरे में आ सकता है.
ऐसे में NASA की यह रिपोर्ट केवल अमेरिका के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए चेतावनी है कि यदि हमने अभी कदम नहीं उठाए तो 2050 तक कई तटीय सभ्यताएं इतिहास बनकर रह जाएंगी.